राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के तहत उपभोक्ताओं को पोस्टपेड या प्रीपेड मीटर चुनने का विकल्प प्राप्त है, लेकिन इसका पालन नहीं किया जा रहा था। अब नियामक आयोग द्वारा जारी नई कास्ट डाटा बुक में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि पोस्टपेड कनेक्शन पर सिक्योरिटी राशि लेकर उपभोक्ता को पोस्टपेड कनेक्शन रखना पूर्णतः कानूनी है।
स्मार्ट मीटर तकनीकी रूप से पोस्टपेड और प्रीपेड दोनों मोड में काम करता है। इसलिए उपभोक्ता की सहमति के बिना प्रीपेड मोड में कनेक्शन देना विद्युत अधिनियम के खिलाफ है। नई कास्ट डाटा बुक के जारी होने से नियामक आयोग ने बिजली कंपनियों को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि स्मार्ट मीटर लगाए जा सकते हैं, लेकिन उनका मोड (प्रीपेड या पोस्टपेड) उपभोक्ता की सहमति पर ही निर्भर करेगा। परिषद अध्यक्ष ने कहा कि कार्पोरेशन प्रबंधन अथवा निगमों के प्रबंधन उपभोक्ताओं को जबरन प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाते हैं तो इसका विरोध किया जाएगा। नियामक आयोग में याचिका लगाई जाएगी।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा बृहस्पितवार को ऊर्जा मंत्री एके शर्मा और नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार और सदस्य संजय कुमार सिंह से मुलाकात की। उन्हें नई कास्ट डाटाबुक में उपभोक्ता को राहत देने के लिए आभार जताया। कहा कि यह प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को एक बड़ा तोहफा है।