राज्य सरकार ने उर्दू शिक्षकों की नियुक्ति की राह आसान कर दी है। सरकार ने मोअल्लिम-ए-उर्दू उपाधि धारकों को उर्दू शिक्षक बनाने के लिए नया फार्मूला खोजा है। इस फार्मूले के तहत टीईटी की तर्ज पर उनकी अलग से परीक्षा कराई जाएगी। यह परीक्षा 150 अंकों की होगी और इसमें भाषा के साथ सामान्य ज्ञान व उर्दू से संबंधित प्रश्न होंगे। इसमें गणित और अंग्रेजी के प्रश्न नहीं होंगे।
परीक्षार्थियों को इसमें उत्तीर्ण होने के लिए न्यूनतम 60 अंक प्राप्त करने होंगे। हालांकि अभी इसपर सहमति नहीं बन पाई है कि परीक्षा टीईटी के साथ कराई जाएगी या फिर अलग से। प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा सुनील कुमार ने इस संबंध में गुरुवार को मोअल्लिम ए उर्दू वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ बैठक की और इसके आधार पर इस फार्मूले पर सहमति बन गई है।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद बेसिक स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य कर दिया गया है। प्रदेश में उर्दू शिक्षक के 2911 पद खाली हैं। राज्य सरकार इन पदों पर मोअल्लिम-ए-उर्दू और अलीगढ़ मुसलिम विश्वविद्यालय से डिप्लोमा इन टीचिंग करने वालों को रखना चाहती है। इसके लिए 11 अगस्त 1997 से पहले वालों को पात्र माना गया है। इसके लिए टीईटी सबसे बड़ी समस्या है।
मोअल्लिम वेलफेयर एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव राकेश गर्ग से मुलाकात कर टीईटी के समकक्ष परीक्षा कराने का सुझाव दिया था। इसके आधार पर ही बेसिक शिक्षा विभाग ने नया प्रस्ताव तैयार किया है। इसके लिए बेसिक शिक्षा अधिनियम 1981 में 17-ए जोड़ा गया है। इसमें ही मोअल्लिम वालों के लिए अलग से परीक्षा कराने की व्यवस्था की गई है। अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि परीक्षा टीईटी के साथ कराई जाएगी या फिर कुछ दिन पहले। इस पर अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री को करना है। इसके बाद कैबिनेट से प्रस्ताव को मंजूरी के लिए रखा जाएगा।