आगरा में लोहा कारोबारियों ने चुनावी मुद्दों पर बात की।
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आगरा के लोहा कारोबारी इन दिनों कई मुद्दों को लेकर परेशान हैं। कारोबारियों का कहना है कि उन्हें बेवजह प्रदूषण और आयकर को लेकर परेशान किया जाता है। सरकार से भी कोई मदद नहीं मिल रही है। इसके चलते इंडस्ट्री धीरे-धीरे बंदी के कगार पर पहुंच चुकी है। दस साल पहले जितना काम था, आज उसका आधा काम भी नहीं बचा है। पढ़िए कारोबारियों ने क्या कहा?
लोहा कारोबारी शैलेश अग्रवाल ने कहा कि आगरा में मुगलकाल से लोहे का काम हो रहा है। पहले यहां बड़े पैमाने पर काम होता था। पिछले एक साल में लोहे के दाम में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। इसके चलते कारोबार पर बुरा असर पड़ा है। सरकार ने बहुत दावा किया कि कारोबार को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन हकीकत ये है कि इस क्षेत्र में कारोबारियों को बहुत नुकसान हुआ है। एमएसएमई इंडस्ट्री परेशान है। प्रदूषण के नाम पर कई तरह की पाबंदियां लगाई जा रही हैं, इस पर रोक लगनी चाहिए।
व्यवसायी जतिन अग्रवाल ने कहा कि पहले के मुताबले काम में काफी मंदी आई है। सरकार से ज्यादा प्रोत्साहन नहीं मिल पा रहा है। सरकार को लोहे की कीमतों पर नियंत्रण रखना चाहिए। बिजली का बिल भी बड़ा मुद्दा है।
व्यवसायी अरविंद शुक्ला ने कहा कि आगरा की इंडस्ट्री धीरे-धीरे खत्म हो रही है। 10 साल पहले जितना काम था, आज उसका आधा भी नहीं है। चरन बंसल ने कहा कि कच्चे मालों के दाम तय नहीं है। इसलिए बेचने और खरीदने में परेशानी आती है। ईमानदारी से काम करने के बावजूद टैक्स विभाग परेशान करता है।
मजदूरों ने क्या कहा?
लोहा फैक्ट्री में काम करने वाले मजदूर बंटी यादव ने कहा कि लोहे का कारोबार काफी कम हो गया है। पहले यहां काम करने पर 700-800 रुपए मजदूरी मिल जाती थी, अब 200-250 मिल रही है। भाजपा की सरकार आने के बाद इसमें गिरावट हुई है। शंकरलाल और बॉबी यादव ने भी कहा कि अब ज्यादा काम नहीं मिल पाता है।