शासन की दखल के चलते वाणिज्य कर विभाग के लिपिक कर्मियों की माने तो शासन ने पहले नई भर्ती के लिए 2500 पद स्वीकृत किए थे, लेकिन किन्हीं कारणों से यह पद भरे नहीं जा सके।
शासन ने जब इन पदों को भरने की मंजूरी दी तो स्वीकृत लिपिक पदों की संख्या 2500 से घटाकर 1138 कर दी। कर्मियों का कहना कि वर्तमान में कार्यरत और नए पदों की भर्ती को जोड़ कर भी कुल स्वीकृत लिपिक संवर्ग के पद पूरे नहीं हो रहे हैं।
जनवरी 2008 में वैट के प्रभावी होने के बाद लिपिक संवर्ग का काम बढ़ा तो मिनिस्टीरियल एसोसिएशन ने प्रमुख सचिव (कर एवं निबंधन) को पत्र लिखकर लिपिक संवर्ग के 4000 पदों पर नई भर्ती करने की मांग की थी, जिसकी एवज में शासन ने मात्र 2500 पदों पर भर्ती करने की स्वीकृति प्रदान की।
इसी प्रकार अधिकारियों के पद भी स्वीकृत हुए, लेकिन लिपिक के पदों पर माया सरकार में रोक के चलते भर्ती नहीं हो सकी।
अखिलेश सरकार ने अब पहले स्वीकृत हुए 2500 पदों को घटाते हुए मात्र 1138 पदों पर नई भर्ती की मंजूरी दी है।
वैट से काम बढ़ा पर कर्मचारी घटे
यूपी मिनिस्टीरियल सर्विसेज एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष भूपेश अवस्थी बताते कि वाणिज्य कर विभाग में वैट प्रभावी होने के बाद खासतौर पर लिपिक संवर्ग के कर्मियों का काम बढ़ गया है।
उन्होंने बताया विभाग के पुनर्गठन के बाद कुल असिस्टेंट कमिश्नर (कर निर्धारण) के दफ्तर यानी खंडों की संख्या 255 से बढ़कर 495 हो गई। प्रदेश में जो 14 जोनल कमिश्नर के दफ्तर थे उनकी संख्या 20 कर दी गई।
इसके कारण एडिशनल कमिश्नर, ज्वाइंट कमिश्नर, डिप्टी कमिश्नर, असिस्टेंट कमिश्नर एवं ट्रेड टैक्स ऑफीसर के पद भी बढ़ाए गए।
इसके कारण लिपिक का काम बढ़ा, लेकिन कर्मचारी नहीं बढ़े। कर्मियों को देर शाम तक दफ्तर में रुकना पड़ता है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 1992 में लिपिक के स्वीकृत पद 7273 थे। इनमें से रिटायर होते-होते 3200 बचे हैं। जब 1138 की भर्ती हो जाएगी तो कुल लिपिक के कर्मचारी 4338 ही होंगे जो स्वीकृत मूल पद से भी कम हैं।