उन्नाव। बांगरमऊ विधानसभा सीट सत्ताधारी भाजपा के साथ सपा, बसपा और कांग्रेस के लिए काफी अहम मानी जा रही है। भाजपा के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि कभी इस सीट पर पार्टी प्रत्याशियों को जीत हासिल करना दूर की कौड़ी साबित होता था। पिछले आम व उपचुनाव में यहां की जनता ने भाजपा के ही उम्मीदवारों पर भरोसा जताया। जिस कारण अब इस हाईप्रोफाइल सीट पर सभी की निगाहें लगी हुई हैं।
वर्ष 1962 से अस्तित्व में आई बांगरमऊ विधानसभा में अब तक 16 चुनाव हो चुके हैं। वैसे भारतीय जनता पार्टी के लिए इस विधानसभा सीट पर जीत हासिल करना एक सपना ही रहा। लेकिन 2017 में सर्जिकल स्ट्राइक और मोदी के मिले-जुले असर ने 2017 में अभेद्य साबित हो रहे इस ‘किले’ पर भी भाजपा ने भगवा लहरा दिया। सपा छोड़कर भाजपा का दामन थामने वाले कुलदीप सेंगर (अब दुष्कर्म में उम्रकैद के सजायाफ्ता) ने पहली बार इस सीट पर कमल खिलाया था। कुलदीप को सजा होने के बाद उनकी विधायकी गई तो 2020 में हुए उपचुनाव में भाजपा के ही श्रीकांत कटियार को यहां के वोटरों ने जिताकर विधानसभा भेजा।
पूर्व के चुनाव के नतीजों पर गौर किया जाए तो इस विधानसभा के वोटरों ने भाजपा को ज्यादा महत्व नहीं दिया। शायद इसीलिए किसी चुनाव में भाजपा 11वें, 8वें स्थान पर रही। बड़ी बात यह है कि यहां के मतदाताओं ने अन्य दलों कांग्रेस, बसपा और सपा को खूब समर्थन किया। कांग्रेस 5, सपा 3 और बसपा 2 बार इस सीट पर विजय हासिल कर सकी। 2022 के आम चुनाव में यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा अपने इस किले को बचाने में सफल रह पाती है या नहीं। या फिर कांग्रेस, सपा या फिर बसपा अपने वोटरों को अपने पक्ष में करने में कामयाब होती है।
पिता को मिलती रही जीत, समीकरणों में उलझ गई बेटी
वर्ष 2007 में कांग्रेस के टिकट पर आरती बाजपेई ने बांगरमऊ से विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा। उन्हें 13375 वोट मिले थे और वह चौथे स्थान पर रही थीं। 2012 के चुनाव से ठीक पहले पार्टी ने उनका टिकट काट दिया तो उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और 17098 वोट हासिल किए। बड़ी बात यह रही कि आरती बाजपेयी दिग्गज कांग्रेसी नेता स्व. पूर्व गृहमंत्री गोपीनाथ दीक्षित की बेटी हैं। उनके पिता को क्षेत्र के मतदाताओं ने वर्ष 1969, 1980, 1985 और 1991 में बांगरमऊ से ही जिताकर विधानसभा भेजा। वह प्रदेश सरकार में मंत्री और गृहमंत्री तक रहे लेकिन बेटी को जनता ने एक भी मौका नहीं दिया। 2020 के उपचुनाव में कांग्रेस ने फिर से आरती बाजपेयी पर ही भरोसा जताया लेकिन इसमें भी आरती दूसरे नंबर पर रहीं। एकबार फिर कांग्रेस ने उन्हें प्रत्याशी बनाकर चुनाव मैदान में उतारा है।
मतदाताओं ने तीन बार दी साइकिल को रफ्तार
कांग्रेस के हाशिए पर जाने के बाद इस विधानसभा क्षेत्र में सपा की साइकिल लोगों की पसंद बनी। इसमें 1993 में चौ. अशोक कुमार सिंह, 2007 में कुलदीप सेंगर व 2012 के चुनाव में बदलू खां ने बाजी मारी। जबकि 1996 व 2002 में बसपा से रामशंकर पाल क्षेत्र की जनता की पसंद बने।
अब तक यह चुने गए हैं विधायक
वर्ष विधायक पार्टी
1962 सेवाराम (सुरक्षित) कांग्रेस
1967 शिवगोपाल बीजेएस
1969 गोपीनाथ दीक्षित कांग्रेस
1974 राघवेंद्र सिंह बीकेडी
1977 जगदीश त्रिवेदी जेेएनपी
1980 गोपीनाथ दीक्षित कांग्रेस
1985 गोपीनाथ दीक्षित कांग्रेस
1989 चौ. अशोक सिंह जनता दल
1991 गोपीनाथ दीक्षित कांग्रेस
1993 चौ. अशोक सिंह सपा
1996 रामशंकर पाल बसपा
2002 रामशंकर पाल बसपा
2007 कुलदीप सेंगर सपा
2012 बदलू खां सपा
2017 कुलदीप सेंगर भाजपा
2020 उपचुनाव श्रीकांत कटियार भाजपा