जिला अस्पताल में भर्ती मरीज। संवाद
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उन्नाव। जिला अस्पताल की इमरजेंसी आए बुखार पीड़ित मरीजों में युवती की मौत हो गई। वहीं, पांच मरीजों को भर्ती कराया गया है। ओपीडी बंद होने से बुखार के 25 मरीज पहुंचे। उन्हें दवा देकर वापस किया गया। सभी को जांच के लिए सोमवार को बुलाया गया।
रविवार को ओपीडी बंद होने से इमरजेंसी में सुबह 7 से दोपहर 2 बजे तक बुखार पीड़ित 25 मरीज दिखाने पहुंचे। इसमें आवास की पूनम शुक्ला (43) पत्नी राजू शुक्ला की हालत अधिक गंभीर होने से उनकी मौत हो गई। पति ने बताया कि चार दिन से बुखार खांसी आ रही थी। मेडिकल स्टोर से दवा लेकर खिलाया लेकिन हालत में सुधार न होने पर जिला अस्पताल लाया था।
अजगैन के गंगाबक्शखेड़ा निवासी शिवप्यारी (65) पत्नी बुद्धीलाल, अचलगंज जमुका के रंजीत (8) पुत्र इंद्रबहादुर, सुमेरपुर के ओम सैनी (ढाईसाल) पुत्र अजीत कुमार, शहर के मुल्लनतरफ मोहल्ला निवासी हुमैरा (2) पुत्री जावेद व शुक्लागंज के शक्तिनगर निवासी कुसमा शुक्ला (50) पत्नी रामदेव को इमरजेंसी में भर्ती कराया गया है।
इमरजेंसी में मरीज देख रहे डॉ. अजीत सिंह ने बताया कि बुखार आने पर लोग घर पर ही इलाज किया करते हैं। थोड़ी देर बुखार उतरने पर उन्हें लगता है आराम मिल गया। बाद में दवा खाने में भी लापरवाही करते हैं। इससे हालत बिगड़ जाती है। बुखार आने पर थर्मामीटर से उसे नापें। 100 डिग्री तक बुखार पहुंचता है तो तुरंत अच्छे डॉक्टर को दिखाएं।
बुखार से युवक की मौत
फतेहपुर चौरासी संवाद के अनुसार लखनऊ के निजी अस्पताल से इलाज कराकर वापस घर लौट रहे युवक की रास्ते में मौत हो गई। सैंता गांव निवासी मोइनुद्दीन (25) पुत्र कल्लू को बीस दिन से बुखार आ रहा था। परिजन पहले उसका सफीपुर के निजी अस्पताल में इलाज कराते रहे। शनिवार को हालत बिगड़ने पर परिजन लखनऊ के निजी अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टर ने भर्ती कर डेंगू किट से जांच की तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई। बाद में सैंपल की जांच लैब से कराई गई तो रविवार को रिपोर्ट निगेटिव आई। डॉक्टर ने दवा देकर घर ले जाने की बात कही। परिजन घर ला रहे थे। रास्ते में उसकी मौत हो गई। मृतक ई-रिक्शा चलाकर परिवार का पालन-पोषण करता था।