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करोड़ों के गोलमाल में बढ़े जांच टीम के सदस्य

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उन्नाव। पंचायतीराज विभाग में करोड़ों के गोलमाल के मामले में गठित की गई जांच टीम में सदस्यों की संख्या बढ़ा दी गई है। अब चार सदस्यीय टीम मामले की जांच करेगी।
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वित्तीय वर्ष 2019-20 में आइईसी (सूचना शिक्षा संचार) मद, प्रशासनिक व शौचालय व्यय में 16.67 करोड़ खर्च किए जाने की सीए द्वारा तैयार की ऑडिट रिपोर्ट व उपयोगिता प्रमाणपत्र पूर्व डीपीआरओ राजेंद्र प्रसाद यादव ने डीएम के सामने प्रस्तुत किया था। डीएम ने इस पर आइईसी मद में किस कार्य पर कब, कब व्यय हुआ इसका विवरण मांगा था। इसके अलावा प्रशासनिक (संविदा कार्मिकों का मानदेय, वाहन में ईंधन) व शौचालय व्यय में मदवार खर्च और उपयोगिता प्रमाणपत्र एडीओ पंचायत व बीडीओ के माध्यम से प्राप्त कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।
राजेंद्र प्रसाद पर आरोप है कि उन्होंने इस सबंध में कोई विवरण प्रस्तुत नहीं किया। वहीं, मात्र पंचायत सचिव के हस्ताक्षर वाले उपभोग प्रमाणपत्र तैयार कराए। प्रधान तक के हस्ताक्षर नहीं कराए। जबकि राजेंद्र प्रसाद ने आरोपों को नकारा था। डीएम ने इसे वित्तीय अनियमितता मानते हुए एक सितंबर को उनके निलंबन के लिए पत्र अपर मुख्य सचिव को भेजा था। साथ ही आगे की कार्रवाई के लिए दो सदस्यीय जांच टीम गठित की थी।
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टीम में पहले परियोजना निदेशक डीआरडीए व जिला पंचायत के वित्तीय परामर्शदाता को शामिल किया गया था। अब सीडीओ दिव्यांशु पटेल ने जांच टीम में सदस्य बढ़ा दिए हैं। अब जांच टीम में परियोजना निदेशक डीआरडीए जसवंत सिंह, डीडीओ मनीष कुमार, जिला कोषाधिकारी अखिलेश सोनकर और जिला अर्थ एवं सांख्यिकी अधिकारी राजदीप वर्मा को शामिल किया गया है।
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