सफीपुर (उन्नाव)। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के बाद भी ब्लाक के गांव खोखापुर निवासी बिटोला ने हिम्मत नहीं हारी। एक बीघा खेत बटाई पर लेकर प्रतिकूल मौसम में भी समय से पहले (ऑफ सीजन) सब्जियों की पैदावार की। इससे बाजार में अच्छे दाम मिले। खेती के जरिये तरक्की की राह पर चलकर वह दूसरों के लिए भी मिसाल बन गईं हैं। रोशनी नाम से महिला स्वयं सहायता समूह बनाकर वह गांव की 10 महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ चुकी हैं।
ग्राम खोखापुर निवासी बिटोला के पति बाबूलाल खेती और मजदूरी कर परिवार का खर्च चलाते थे। घरेलू कार्यों में व्यस्त रहने वाली बिटोला के दो बेटे हुए तो उन्होंने उनकी अच्छी परवरिश और शिक्षा के लिए खेती में पति का हाथ बटाना शुरू किया। राष्ट्रीय आजीविका मिशन से 1.10 लाख का ऋण लिया और 2019 में एक बीघा खेत बटाई पर लेकर धान की फसल बोई। 55 हजार रुपये की बचत हुई तो उनके हौसले को पंख लग गए। इसके बाद मटर की खेती की खेती तो 50 हजार रुपये की बचत हुई। इसके बाद उन्होंने कुछ नया करने की सोची और इसमें भी सफल हुईं। (संवाद)
इस तरह किया प्रयोग
लाखों के पॉली हाउस और अन्य संसाधन न होने पर बिटोला ने परंपरागत पान के भीठ की तर्ज पर खर पतवार से झोपड़ीनुमा शेड बनाकर समय से पहले (ऑफ सीजन) सब्जियों की पैदावार शुरू की। विपरीत मौसम में मिर्च, परवल, कुंदरु, धनिया, गोभी, बंदगोभी, टमाटर आदि की पैदावार की। बिटोला ने बताया कि वर्तमान में उन्हें साल में एक लाख रुपये की बचत हो जाती है।
बेटों को अफसर बनाने की तमन्ना
बिटोला खुद नहीं पढ़ सकीं लेकिन शिक्षा की अहमियत जानती हैं। उन्होंने इसी सोच को कायम रखकर मेहनत से परिवार की आर्थिक स्थिति बदली। दोनों बेटों को पढ़ा लिखा रहीं हैं। बड़ा बेटा कमल बीएससी कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है। जबकि छोटा बेटा विमल स्नातक अंतिम वर्ष में है। मां की तमन्ना है कि बेटे अफसर बनें।
महिलाएं खेती और बकरी पालन से जुड़ीं
स्वयं सहायता समूह से होने वाली बचत से गांव की 10 महिलाएं खेती और बकरी पालन कर रहीं हैं। इनमें माया, शिवदेवी, अंजू और शांती समूह से 20-20 हजार रुपये ऋण लेकर बटाई पर खेती कर रहीं हैं। शिरानी, सोना और राजेश्वरी बकरी पालन से जुड़ी हैं।