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मन में राम और किरदार में रावण

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रावण की किरदार निभाने वाले शिक्षक विवेक दीक्षित। संवाद - फोटो : UNNAO
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फतेहपुर चौरासी/उन्नाव। रामलीलाओं में रावण का अभियन करने वालों के मन में राम ही बसते हैं। राम उनके आराध्य हैं। अभियन करने वालों ने बातचीत में अपने मन की भावनाएं व्यक्त कीं। बताया कि अट्टहास स्वयं में सर्वशक्तिमान के अहंकार की अनुभूति देता है। गर्जना से दर्शक तक भयभीत होते है। तब लगता है कि अभिनय साकार हो गया। राम हाथों परास्त होने पर अंतिम समय में रावण के रूप में खुद को रखने पर जो सुखद अनुभूति होती है उसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता।
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ऊगू कस्बा के दिक्षिताना निवासी विवेक दीक्षित कस्बे में होने वाली रामलीला में 10 साल से रावण का अभिनय कर रहे हैं। इस रामलीला में सभी पात्र स्थानीय लोग ही निभाते हैं। 32 वर्षीय विवेक पेशे से शिक्षक हैं। बताया कि अभियन उनका पेशा नहीं शौक है। भगवान राम और शिव के उपासक विवेक के परिवार में मां सावित्री, पत्नी रचना और एक बेटा शुभ है। बताया कि रामायण और दूसरे ग्रंथ पढ़कर रावण की भक्ति, शक्ति और ज्ञान सहित जीवन का हर पहलू जानने का प्रयास किया है। उसे ही अपने अभिन में उतार कर किरदार को जीवंत करने का प्रयास करते हैं।
उन्नाव के आवास विकास वृंदावन गार्डन में हो रही रामलीला में रावण का अभिनय करने वाले रसिया लाल शर्मा वृंदावन के मोहल्ला मोहन घेरा के रहने वाले हैं। बताया कि वह सात साल की उम्र से रामलीला और कृष्ण लीला का मंचन कर रहे हैं। बताते हैं कि रामलीला और कृष्णलीला के लगभग सभी पात्रों का अभिनय उन्हें आता है और डायलॉग कंठस्थ हैं। बताया कि अभियन ही उनकी जीविका का मुख्य साधन है। वह लोगों में रामलीला देखने के घटते प्रचलन को लेकर चिंतित भी हैं। बताते हैं कि दर्शकों की कमी उत्साह को कम करती है। बताया कि पत्नी नीलम व दो बेटे सोनू और प्रदीप हैं। सोनू ने एमबीए किया है। प्रदीप साफ्टवेयर इंजीनियर है।
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