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गरीबों के घर अमीरों के नाम

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उन्नाव। गरीबों को पक्के आवास का लाभ देने के लिए चलाई जा रही प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी और ग्रामीण) में भ्रष्टाचार हुआ है। जांच में 43 अपात्रों को योजनाओं का लाभ देने का खुलासा हुआ है। अब इन अपात्रों से सरकारी धन की रिकवरी की गई है। जिम्मेदारों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
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केंद्र सरकार ने ग्रामीण क्षेत्र के बेघर व कच्चे घरों में रहने वाले गरीबों को पक्के आवास देने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना चलाई। ग्रामीण आवास योजना में लाभार्थियों का चयन 2011 में हुई सामाजिक, आर्थिक जनगणना से करने की व्यवस्था थी। इन्हें सरकार ने प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के तहत पक्का मकान बनाने के लिए लाभ देने के लिए योजना चलाई है। भ्रष्टाचार के कारण अपात्रों का पात्र बना दिया गया। शिकायतें मिलने पर सीडीओ ने जांच कराई तो भारी संख्या में अपात्र मिले। इसमें सबसे ज्यादा 29 अपात्र औरास ब्लाक में मिले। सभी के पास पूर्व से ही पक्के आवास होने की पुष्टि हुई। बांगरमऊ में पांच, नवाबगंज, हसनगंज में तीन, सुमेरपुर में दो और असोहा में एक अपात्र मिला। इन सभी को पहली किस्त के रूप में 40 हजार रुपये दिए गए थे। इसकी 17.20 लाख रुपये की रिकवरी कराकर शासन के खाते में भेज दिया गया है।
योजना के तहत लाभार्थियाें को तीन किस्तों में 1.20 लाख रुपये की धनराशि दी जाती है। इसमें पहली किस्त 40 हजार रुपये, दूसरी किस्त 70 हजार रुपये और तीसरी किस्त के रूप में 10 हजार रुपये दिए जाते हैं।
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औरास विकासखंड के गांव इमायतीपुर में वली को पहले प्रधानमंत्री आवास ग्रामीण का लाभार्थी बनाया गया। पहली किस्त के रूप में 40 हजार रुपये खाते में भेजे गए। शिकायत पर जांच हुई तो पक्का आवास होने की पुष्टि होने पर धनराशि की रिकवरी कराई गई। हसनगंज की पुरौली गांव की गीता के खाते में भी 40 हजार रुपये भेजे गए थे। जांच में पक्का आवास बना मिला। इसी आधार पर गीता से पैसा ले लिया गया।
अपात्रों से पहली किस्त की रिकवरी कर ली गई है। प्रधानमंत्री आवास का आवंटन पूरी तरह से सचिव स्तर से ही होता है। योजना का लाभ अपात्रों को दिए जाने की जिम्मेदारी पंचायत सचिव की है। इसलिए सचिवों पर कार्रवाई की जाएगी।
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-डॉ. राजेश कुमार प्रजापति, सीडीओ
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