उन्नाव के पीखी गांव में घरों में जाकर लोगों को कोविड टीकाकरण के लिए जागरूक करतीं नौबहार बानो। संव
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सफीपुर। कोरोना के कहर के बीच फैली भ्रांतियों के बीच सफीपुर ब्लाक के पीखी गांव में टीकाकरण करना स्वास्थ्य विभाग के लिए मुश्किल बन गया था। ऐसे में गांव की नौबहार ने स्वास्थ्य विभाग की मदद के लिए अपने कदम बढ़ाए। खुद टीका लगवाते हुए लोगों को जागरूक करना शुरू किया। इसका नतीजा रहा कि कैंप में एक भी व्यक्ति के टीका न लगवाने से शून्य रही संख्या आज 452 हो गई है। नौबहार बानो पर यूनिसेफ ने एक डाक्यूमेंट्री बनवाई है। इसे यू ट्यूब, ट्यूटर सहित अन्य सोशल मीडिया पर शेयर कर टीकाकरण के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
मुस्लिम आबादी बाहुल्य पीखी गांव की आबादी 1917 है। गांव के 1500 लोगों का टीकाकरण करने का लक्ष्य है। अधिकांश युवा गमला बनाने के व्यवसाय से जुड़े होने से प्रवासी हैं। कोविड संक्रमण के दौरान गांव में प्रवासियों की संख्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने गांव में टीकाकरण कैंप लगाए। 16 मई को कैंप में कोई नहीं पहुंचा। संख्या शून्य होने की जानकारी पर यूनिसेफ की ब्लॉक कॉर्डिनेटर रूबी खानम ने गांव के लोगों को जागरूक किया। इसके बाद 18 मई को हुए कैंप में सिर्फ दो लोगों नौबहार और गांव के प्रधान हसीबउद्दीन ने टीका लगवाया। ब्लाक क्वार्डिनेटर ने नौबहार से मुलाकात की। पता चला कि वह 20 साल की इंटर पास हैं। वह प्रौढ़ शिक्षा के लिए भी काफी सफल प्रयास कर चुकी हैं। गांव में टीकाकरण के लिए नौबहार बनो से जागरूकता के लिए मदद मांगी। इसके बाद वह घर-घर जाकर लोगों को खुद व परिवार के सदस्यों के टीकाकरण का हवाला देकर भ्रांतियों को दूर करने लगी। 23 जून को हुए कैंप में टीका लगवाने वालों की संख्या 228 पहुंच गई। 30 जुुलाई को 65 और 14 अगस्त को 157 लोगों ने टीका लगवाया। नौबहार के इस सफल प्रयास पर यूनिसेफ की ब्लॉक कॉर्डिनेटर रूबी खानम और जिला मैनेजर मोहम्मद दिलशाद ने नौबहार बानो की डाक्यूमेंट्री बनवाई है। यूनिसेफ इस डाक्यूमेंट्री के माध्यम से लोगों को जागरूक कर रहा है।
नौबहरा बानो ने बताया कि उनका मकसद गांव के लोगों को कोरोना से बचाना है। गांव के हर व्यक्ति को वह अपने परिवार का सदस्य मानती हैं। उनका जीवन संकट में होगा तो उन्हें भी दुख होता है। गांव के लोगों की भलाई में शुरुआत से ही लगी रहीं।