दही थाना पुलिस की गिरफ्त में पूर्र्व विधायक का पौत्र शशांक पाठक (स्लेटी व सफेद टीशर्ट में) व अन्य आ
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सोनिक। स्लाटर हाउस के इंजीनियर को अगवा करने में पकड़े गए बिहार प्रांत के सीवान जिले की पूर्व विधायक के पौत्र समेत तीन आरोपियों को जेल भेज दिया गया। फरार आरोपी की तलाश में पुलिस दबिश दे रही है।
दही औद्योगिक क्षेत्र स्थित एओवी स्लाटर हाउस के इलेक्ट्रिक इंजीनियर राजस्थान के झुंझनू जिले के नवलगढ़ निवासी राजेंद्र कुमार को रविवार को कार से अगवा कर लिया गया था। अपहरण की साजिश रचने वाले बिहार के सीवान जिले की पूर्व विधायक आशा पाठक के पौत्र शशांक पाठक ने इंजीनियर के गूगल पे अकाउंट से 1.5 लाख रुपये अपने खाते में ट्रांसफर कर लिए थे। पुलिस ने शशांक, उसके दोस्त मौरावां निवासी अभिषेक द्विवेदी व सरोजनी नगर लखनऊ निवासी प्रथम चौहान को गिरफ्तार कर लिया था। एक आरोपी पुलिस को गच्चा देकर भाग निकला था। मंगलवार को पकड़े गए तीनों आरोपियों को पुलिस ने न्यायालय में पेश किया। वहां से सभी को जेल भेजा गया है। भागे आरोपी की पुलिस तलाश कर रही है।
पुलिस के अनुसार आरोपी शशांक के हाथ उसके बाबा दिवंगत रमाकांत व पिता संजय पाठक की एक डायरी लग गई थी। डायरी में जिन-जिन लोगाें ने रुपये ले रखे थे, उनका पूरा लेखाजोखा उसमें दर्ज था। ब्योरा देखकर शशांक उन लोगों तक पहुंचने के लिए फेसबुक में उनकी प्रोफाइल सर्च करता था। छह माह पहले उसने इसी डायरी को देखकर लखनऊ के एक कारोबारी को उठाया था। उस वक्त वह पुलिस की पकड़ में नहीं आया था। पकड़े जाने के बाद उसने पुलिस को जब इस बात की जानकारी दी तो पुलिस उसके लखनऊ स्थित आवास पर पहुंची और वह डायरी लेकर आई। डायरी में उसके बाबा व पिता द्वारा किया गया लेनदेन अंकित मिला है।
पकड़े जाने के बाद शशांक अपनी गलती पर बहुत पछताया। उसने पुलिस से कहा कि उसे नहीं पता था उसका यह कृत्य अपहरण की श्रेणी में आ जाएगा। शुरुआती दौर में पुलिस भी उसे बचाना चाह रही थी, पर उसके खिलाफ मिले साक्ष्यों को पुलिस पचा नहीं पाई और शशांक के साथ उसके दो दोस्तों को गिरफ्तार कर लिया।
एक समय था जब बिहार के सीवान में आरजेडी के दिवंगत नेता शहाबुद्दीन का वर्चस्व था। बताते हैं कि शहाबुद्दीन की दबंग छवि के चलते लोग किसी भी पार्टी का झंडा अपने घरों पर लगाने से कतराते थे। उस वक्त बीजेपी के कद्दावर नेता रहे स्व. रमाकांत पाठक ने अपने घर पर बीजेपी का झंडा लगाकर बाहुबली के सामने ताल ठोकी थी। अपनी ईमानदारी से पहचान बनाने वाले रमाकांत ने बेटे को खोने के बाद भी भाजपा का साथ नहीं छोड़ा था और पत्नी को विधायक बनवाया था। पौत्र ने परिवार की साख परबट्टा लगा दिया। बाबा व दादी की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए शशांक भी राजनीति में उतर गया। वह पढ़ाई के साथ-साथ छात्र राजनीति से जुड़ गया। वह कोयले का कारोबार भी करता है। इस दौरान ही उसकी मुलाकात मौरावां के टोपरा गांव निवासी अभिषेक द्विवेदी से हुई। अभिषेक उसके बाबा के साथ पूर्व में रह चुका था। बाबा से किसने कितने रुपये लिए इस बात की जानकारी उसने शशांक को दी।