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मुर्दे को जिंदा बताकर परिजनों का हंगामा

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मृत युवक को जीवित बता जिला अस्पताल की इमरजेंसी में हंगामा करते परिजन। संवाद - फोटो : UNNAO
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उन्नाव। सड़क हादसे में मृत युवक का 21 घंटे से मर्च्युरी में रखा शव देखने पहुंचे लोगों से एक सिपाही ने उसके (मृतक) जीवित होने की बात कही। आक्रोशित परिजन व दोस्त शव को मर्च्युरी से उठाकर इमरजेंसी वार्ड ले गए और डॉक्टर पर आरोप लगा हंगामा करने लगे। पुलिस के समझाने पर भी वह नहीं माने। जीवित होने की बात कह शव को जबरन कानपुर लेकर गए। पुलिस भी पीछे-पीछे कानपुर पहुंची। हैलट अस्पताल में युवक को मृत घोषित कर दिया गया। इसके बाद पुलिस शव को दोबारा पोस्टमार्टम हाउस लाई और पोस्टमार्टम कराया।
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लखनऊ-कानपुर हाईवे पर जगदीशपुर गांव के पास रविवार दोपहर दो बजे लोडर की टक्कर से बाइक सवार लखनऊ के बरकतनगर निवासी वीरेंद्र उर्फ गोलू (30) व उसकी पत्नी कोमल घायल हो गई थी। दोनों को पुलिस ने जिला अस्पताल पहुंचाया था। वहां वीरेंद्र को डॉक्टर ने मृत घोषित कर शव मर्च्युरी में रखवा दिया था। उसकी पत्नी की हालत गंभीर होने पर कानपुर हैलट रेफर कर दिया था। मृतक के पास मिले मोबाइल की मदद से पुलिस ने उसकी कानपुर देहात के गजनेर थाना क्षेत्र के गंगरौली निवासी मौसी आशा को जानकारी दी। मौसी अस्पताल पहुंची तो शव मर्च्युरी में रखा होने की बात कह सोमवार को आने के लिए कहा गया। सोमवार दोपहर 12 बजे आशा, परिजन व रिश्तेदार मर्च्युरी पहुंचे।
औरास की एक मृत युवती का पोस्टमार्टम कराने के लिए पहले से मौजूद एक सिपाही ने वीरेंद्र (मृतक) की सांस चलने की बात कह दी। यह सुनकर परिजन भड़क गए और हंगामा करते हुए शव को जबरन उठाकर जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड ले गए। डॉक्टर को भला बुरा कहकर हंगामा शुरू कर दिया। अजगैन व सदर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और लगभग एक घंटे तक उन्हें समझाने का प्रयास किया। परिजनों ने सिपाही द्वारा जीवित होने की कही बात को आधार बना हंगामा तेज कर दिया। परिजन वीरेंद्र को जीवित बता जबरन शव को अपने वाहन से कानपुर हैलट लेकर चले गए। पुलिस भी पीछे-पीछे हैलट पहुंची। वहां भी डॉक्टरों ने वीरेंद्र को मृत घोषित कर दिया। पुलिस परिजनों को समझा कर शव को फिर पोस्टमार्टम हाउस लाई। उस सिपाही को भी फटकार लगाई गई। पुलिस के काफी समझाने पर परिजन शांत हुए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फेफड़ा व लीवर फटे होने व 24 घंटे पहले मौत होने की पुष्टि हुई है।
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पोस्टमार्टम हाउस पहुंची मृतक वीरेंद्र की मौसी आशा ने बताया कि वीरेंद्र का घर लखनऊ के बरकतनगर में है। चार साल की उम्र में वीरेंद्र के माता-पिता का निधन हो गया था। इसके बाद उसने ही अपने पास रखकर वीरेंद्र को पालन-पोषण किया। मौजूदा समय में वह कानपुर के संजय नगर में रहने वाले मामा इंद्रकुमार के साथ ऑटो पार्ट्स की बिक्री का काम कर रहा था। उसके माता-पिता की मौत के बाद नाना-नानी उसके लखनऊ वाले घर में ही रह रहे हैं। रविवार को वह पत्नी के साथ नाना-नानी को देखने बाइक से लखनऊ जा रहा था और रास्ते में हादसा हो गया।
मृतक की मौसी आशा ने बताया कि चार माह पहले ही उसने वीेरेंद्र की शादी लखनऊ के गोसाईगंज थाना क्षेत्र के जबरौली में की थी। वीरेंद्र की पत्नी कोमल को अभी तक होश नहीं आया है। अभी उसकी हाथों की मेंहदी का रंग भी न छूटा था कि मांग का सिंदूर उजड़ गया।
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