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न्यायालय में नहीं मिला वादकारियों को प्रवेश

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न्यायालय में प्रवेश न दिए जाने से गेट के बाहर मौजूद वादकारी। संवाद - फोटो : UNNAO
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उन्नाव। कोरोना संक्रमण की रफ्तार को देखते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश पर सोमवार को पुलिस ने वादकारियों को कोर्ट परिसर में प्रवेश नहीं दिया। इससे वादकारी गेट पर थोड़ी देर रुकने के बाद लौट गए। अति आवश्यक कार्य पर प्रवेश के लिए जिला जज की अनुमति लेनी होगी।
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न्यायालय गेट नंबर दो पर सोमवार सुबह से ही वादकारियों की भारी भीड़ रही। गेट पर तैनात पर सुरक्षाकर्मियों ने वादकारियों के प्रवेश पर रोक लगा दी। उन्हें बताया गया कि उच्च न्यायालय के आदेश पर कोरोना संक्रमण के कारण वादकारियों के अंदर जाने पर रोक लगाई गई है। वर्तमान में कार्यरत न्यायिक अधिकारियों में से 50 प्रतिशत अधिकारी रूटीन के आधार पर न्यायालय में कार्य करने के लिए उपस्थित रहेंगे। नए दावे व प्रार्थना पत्र केंद्रीय फाइलिंग काउंटर में लिए जाएंगे। सभी प्रार्थना पत्रों पर संबधित अधिवक्ता, वादकारियों का पूर्ण विवरण, मोबाइल नंबर व ईमेल आईडी अंकित होना आवश्यक होगा।
प्रार्थना पत्रों में त्रुटि होने पर संबधित अधिवक्ताओं को सूचना दी जाएगी। आदेश में कहा गया है कि प्रत्येक न्यायालय में उचित दूरी पर अधिवक्ताओं के बैठने के लिए मात्र चार चार कुर्सियां लगाई जाएंगी। गर्भवती महिला न्यायिक अधिकारी व कर्मचारी को पूर्व सूचना के साथ न्यायालय में उपस्थिति से छूट रहेगी। यदि आवश्यक होगा तो घर से कार्य करने की अनुमति दी जाएगी। न्यायालय में कार्यरत पीठासीन अधिकारी प्रत्येक कार्य दिवस (शनिवार) को छोड़कर अपने-अपने न्यायालय में उपस्थित रहकर कार्य करेंगे। वादकारियों का प्रवेश पूरी तरह से वर्जित किया गया है।
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