उन्नाव/बिछिया। सदर तहसील के ओरहर गांव में गंगा एक्सप्रेसवे के दायरे में आ रही 20 हेक्टेअर भूमि के अधिगृहण का रास्ता साफ हो गया है। विभिन्न कारणों से लंबे समय से भूमि का बैनामा अटका हुआ था। सोमवार को छुट्टी के दिन डीएम ने अधिकारियों के साथ गांव में कैंप लगाकर ग्रामीणों की शिकायतें सुनी और निस्तारण भी कराया।
ओरहर में 350 किसानों की 46 हेक्टेअर भूमि गंगा एक्सप्रेसवे के दायरे में आ रही है। राजस्व विभाग के अधिकारी पिछले तीन माह से किसानों की जमीन की जांच-पड़ताल में जुटे हुए हैं। हालांकि काफी प्रयास के बाद मात्र 26 हेक्टेअर भूमि का ही बैनाम हो पाया। शेष भूमि में नक्शे व मुआयने में अंतर मिला। कुछ चकबंदी के चलते विवादित थी। कुछ भूमि के मालिक बाहरी प्रदेशों में रह रहे हैं। इस कारण उनकी भूमि की रजिस्ट्री नहीं हो पा रही थी। डीएम रवींद्र कुमार सिटी मजिस्ट्रेट चंदन पटेल, एसडीएम सत्यप्रिय सिंह और राजस्व अमले के साथ सोमवार को ओरहर गांव पहुंचे। पंचायत भवन में किसानों के साथ बैठक की। उन्होंने किसानों की रजिस्ट्री का काम धीमा पाए जाने पर बातचीत की। साथ ही मौके पर ही अधिकारियों से किसानों की समस्याओं का निस्तारण कराया।
सिटी मजिस्ट्रेट चंदन पटेल ने बताया कि 350 किसानों की 46 हेक्टेअर भूमि की रजिस्ट्री होनी थी। अब तक 50 प्रतिशत किसानों की 26 हेक्टेअर भूमि का बैनामा कराया जा चुका है। कुछ मामलों की रजिस्ट्री में चकबंदी समेत अन्य बिंदुओं का पेंच फंसा था। इसके निस्तारण के लिए गांव में कैंप लगाया गया। इस दौरान काफी किसानों की समस्याएं हल कर दी गई हैं। किसानों से कहा गया है कि वह जल्द सहमति पत्र दे दें। वहीं जो शेष बचे हैं उनके लिए मंगलवार को भी गांव में कैंप लगाया जाएगा। इस दौरान सदर तहसीलदार अतुल सिंह के अलावा गांव के लेखपाल विनोद कुमार मौजूद रहे।
गंगा एक्सप्रेसवे का शिलान्यास अक्तूबर में प्रस्तावित है। इसको देखते हुए शिलान्यास से पहले भूमि अधिगृहण की कार्रवाई पूरी करने की कवायद में जिला प्रशासन के अधिकारी लगे हुए हैं। अभी सहमति के आधार पर भूमि का अधिगृहण किया जा रहा है। यदि बाद में विशेष परिस्थितियां बनती हैं तो अनिवार्य अधिगृहण की कार्रवाई भी की जा सकती है।