उत्तर प्रदेश के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को अब स्कूल जाने में परेशानी नहीं होगी। इनमें पढ़ने वाले बच्चों के घर से यदि स्कूल दूर है तो इनके लिए ट्रांसपोर्ट की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। सर्व शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशालय ने इसके आधार पर जिलों से सुझाव प्राप्त कर प्रस्ताव तैयार कर रहा है। इस संबंध में मानव संसाधन विकास मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा जाएगा।
देश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू किया गया है। इसके तहत 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों की शिक्षा अनिवार्य कर दी गई है। केंद्र और राज्य सरकार इस आयु के बच्चों को स्कूल भेजने के लिए नित नए प्रयास कर रही है। इसके लिए स्कूल खोलने का मानक भी बदल दिया गया है। प्रत्येक एक किमी पर प्राथमिक और तीन किमी पर उच्च प्राथमिक स्कूल खोलने की व्यवस्था की गई है। इसके बाद भी कुछ अभिभावक बच्चों को दूरी का बहाना बनाकर स्कूल नहीं भेजते हैं।
इसलिए सर्व शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशालय घर से दूर स्कूल वाले बच्चों के लिए ट्रांसपोर्ट की सुविधा देने का विचार कर रहा है। परियोजना निदेशालय का मानना है कि जहां स्कूल खोलने के लिए जमीन नहीं मिल रही है ऐसे शहरी क्षेत्रों में पहले चरण में ट्रांसपोर्ट की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। इसके लिए पहले चरण में यह सुविधा केवल 10 लाख से अधिक आबादी वाले जिलों में ही मिलेगी। इसके लिए लखनऊ, कानपुर, आगरा, वाराणसी, मेरठ और इलाहाबाद जिलों में यह सुविधा देने का विचार है।