सुल्तानपुर। जिले में अंत्योदय व पात्र गृहस्थी के कार्डधारक जमींदार बनकर सामने आए हैं। शासन की ओर से कराई गई गेहूं की सरकारी खरीद में करीब चार सौ कार्डधारकों ने करीब 15 करोड़ रुपये का गेहूं सरकारी क्रय केंद्रों पर बेच डाला है। मामला सामने आने पर शासन ने संज्ञान लिया है। शासन के निर्देश पर हुई छानबीन में ऐसे 400 कार्डधारकों का राशन कार्ड निरस्त कर दिया गया है।
सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं की हुई खरीद में एक नए मामले का खुलासा हुआ है। जिले में पात्र गृहस्थी व अंत्योदय के 400 कार्डधारक जमींदार के रूप में सामने आए हैं। कार्ड धारकों ने विपणन विभाग के पोर्टल पर गेहूं बिक्री के लिए पंजीकरण कराते हुए करीब 15 करोड़ रुपये का गेहूं बेच डाला है। प्रकरण संज्ञान में आने पर शासन से कराई गई छानबीन में गेहूं की बिक्री करने वालों में 11 अंत्योदय व 389 पात्र गृहस्थी के कार्डधारक पाए गए हैं।
छानबीन में खुलासे में इन कार्डधारकों में एक-एक कार्डधारक ने तीन लाख रुपये से अधिक व अधिकतम साढ़े छह लाख रुपये तक का गेहूं बेचा है। पंजीकरण में कराए गए आधार लिंक से मामला पकड़ में आया है। पता चला है कि ये ऐसे कार्डधारक हैं जो पात्र गृहस्थी व अंत्योदय से मिलने वाला राशन भी प्रत्येक माह ले रहे हैं। छानबीन में मामला सामने आने पर शासन के निर्देश पर पूर्ति विभाग ने सरकारी क्रय केंद्र पर गेहूं बेचने वाले सभी 400 कार्ड धारकों का राशन कार्ड निरस्त कर दिया है।
पात्र गृहस्थी व अंत्योदय का मानक
पूर्ति विभाग के मुताबिक पात्र गृहस्थी कार्डधारक के पास अधिकतम पांच एकड़ से अधिक भूमि नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही दो लाख रुपये से अधिक आय नहीं होनी चाहिए। इसी तरह अंत्योदय कार्डधारक या तो भूमिहीन की श्रेणी में या फिर मामूली भूमि का मालिक हो। आय एक लाख से कम होनी चाहिए। परिवार के पास दो पहिया वाहन आदि भी नहीं होना चाहिए।
शासन को भेजी गई सूचना
जिला पूर्ति अधिकारी अभय सिंह ने बताया कि शासन से मिली 406 कार्डधारकों की सूचना पर कराई गई छानबीन में 400 कार्डधारक अपात्र पाए गए। इन कार्डधारकों ने तीन लाख रुपये से अधिक गेहूं बेचा है। छानबीन के बाद कार्डधारकों का कार्ड निरस्त कर सूचना शासन को भेज दी गई है।