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कोविड-19 की मार से सुस्त हुई पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे की रफ्तार

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सुल्तानपुर। प्रदेश सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे भी कोरोना की मार से नहीं बच सका। पहले लॉकडाउन के दौरान कार्य ठप रहा। बाद में बड़ी संख्या में कैंप कार्यालय के कर्मचारियों के कोरोना संक्रमित मिलने के बाद कार्य न केवल पिछड़ गया बल्कि सुस्त भी पड़ गया। अब लोगों को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर फर्राटा भरने के लिए थोड़ा और इंतजार करना होगा।
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उत्तर प्रदेश सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे भी कोविड-19 की मार से नहीं बच सका है। लॉकडाउन से दौरान इसका निर्माण कार्य करीब दो महीने बंद रहा। बाद में जिलाधिकारी सी. इंदुमती की पहल पर इसका निर्माण कार्य फिर शुरू हुआ।
कार्य पटरी पर आता कि जयसिंहपुर के पास स्थित कैंप कार्यालय के कर्मचारी बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमित हो गए। जिला प्रशासन को पूरे कैंप को कंटेनमेंट जोन बनाना पड़ा। वर्तमान में सोशल डिस्टेंसिंग मेनटेन कर अपेक्षाकृत कम कर्मचारियों से काम चलाया जा रहा है।
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पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के पैकेज तीन व चार के लिए फिलहाल 71 करोड़ रुपये की जरूरत है। यह धनराशि मिलने पर अगस्त तक पैकेज तीन में 73 व चार में 57 फीसदी कार्य पूरा हो सकेगा। डीएम ने भी अधिग्रहीत की गई भूमि के मुआवजे के लिए 50 करोड़ रुपये की जरूरत बताई है।
लखनऊ के चांद सराय से गाजीपुर के हल्दिया तक निर्माणाधीन छह लेन के पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे की कुल दूरी 340.824 किलोमीटर है। लखनऊ, बाराबंकी, अमेठी, अयोध्या, सुल्तानपुर, अंबेडकरनगर, आजमगढ़, मऊ व गाजीपुर जिलों से होकर गुजरने वाले इस एक्सप्रेस-वे की अमेठी व सुल्तानपुर में दूरी 117.5 किलोमीटर है।
यह अब तक का देश का सबसे बड़ा एक्सप्रेस-वे है। छह लेन के इस एक्सप्रेस-वे की चौड़ाई 120 मीटर होगी। इसके निर्माण पर करीब 12,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के हर आधे किलोमीटर की दूरी पर यूपीडा ग्राउंड वाटर रिचार्ज सिस्टम लगाएगा। जहां पूरे एक्सप्रेस-वे पर बारिश के पानी को ड्रेन के जरिए रिचार्ज सिस्टम में गिराया जाएगा। वहां से पानी पाइप की बोरिंग के सहारे जमीन के अंदर जाकर भूमि का जलस्तर बढ़ाएगा।
पूर्वांचल एक्सप्रेस से प्रदूषण स्तर कम होगा। ईंधन की बचत होगी। दुर्घटनाओं में कमी आएगी। लगभग चार घंटे में लखनऊ से गाजीपुर की यात्रा पूरी की जा सकेगी। सामानों का बड़े बाजारों में परिवहन आसान होगा। कृषि, वाणिज्य, पर्यटन व अन्य औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
यूपीडा के मुख्य अभियंता अनिल पांडेय ने बताया कि सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए वर्ष 2021 तक का लक्ष्य रखा गया है। समय को देखते हुए कंपनियों को कार्य में गति लाने का निर्देश दिया गया है। सभी पैकेज में कार्य तेज चल रहा है। निर्धारित समय में कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
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