सुल्तानपुर। शासन के निजी प्ले ग्रुप स्कूलों की तरह आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन में भवन के अभाव का अड़ंगा लगा है। अपने भवन की कमी से बाल विकास विभाग के 1829 सेंटर अभी उधार के रूप में प्राथमिक विद्यालयों में संचालित हो रहे हैं। प्राथमिक विद्यालयों में केंद्र के संचालित होने से प्ले ग्रुप की तरह सेंटरों के संचालन में अभी दिक्कत आ रही है।
जिला कार्यक्रम विभाग से संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों पर तीन से छह वर्ष के बच्चों को प्ले ग्रुप स्कूल की तरह शिक्षा देने की योजना सरकार ने बनाई है। सेंटरों पर प्ले ग्रुप की तरह शिक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराकर सरकार निजी क्षेत्रों के स्कूलों को मात देने की कोशिश में लगी है। प्राथमिक स्तर की शिक्षा में दाखिले के पहले सरकार प्ले ग्रुप के रूप में तीन से छह वर्ष के बच्चों को तैयार कर उन्हें योग्य बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। सरकार की योजना छोटे बच्चों को अंक, शब्द ज्ञान के साथ खेलकूद जैसी जानकारी देना है, ताकि प्राथमिक विद्यालय में दाखिले के बाद छात्र तेजी से आगे बढ़ सकें। इसके लिए लगातार आंगनबाड़ी केंद्रों व कार्यकर्ताओं को हाईटेक करने की कोशिश चल रही है। हाल ही में सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को स्मार्ट फोन उपलब्ध कराकर इस दिशा में एक और कदम बढ़ाया है।
विभागाय आंकड़ों के मुताबिक कार्यक्रम विभाग के जिले में 2511 सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। इसमें सिर्फ कार्यक्रम विभाग के 384 सेंटरों के ही अपने भवन हैं। 1829 सेंटर बेसिक शिक्षा के प्राथमिक विद्यालयों व शेष करीब 298 सेंटर प्राइवेट कक्षों में संचालित किए जा रहे हैं। अब सरकार की मंशा पर आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन की समस्या आड़े आ रही है। खासकर प्राथमिक विद्यालयों में सेंटर के संचालन में प्राइमरी स्कूलों व आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों के आगमन व छूटने का समय तकरीबन एक होने से दिक्कत आ रही है।