भीषण गर्मी में बढ़ती बिजली की मांग को पूरा करने में तापीय परियोजनाएं हांफने लगी हैं। कोयले की कम खुराक मिलने और उसकी भी गुणवत्ता ठीक न होने का असर भी परियोजनाओं से बिजली उत्पादन पर पड़ रहा है। हाल ये है कि बिजली की न्यूनतम मांग तो तेजी से बढ़ती जा रही है लेकिन उत्पादन में कमी के कारण अधिकतम मांग को मेंटेन करते हुए निगम सेंट्रल पूल से बिजली खरीदने के अतिरिक्त वित्तीय बोझ से बचने की हरसंभव कोशिश में जुटा है। पीक ऑवर में हो रही कटौती को भी इसी का असर माना जा रहा है।
पिछले दिनों बिजली की अधिकतम मांग साढ़े 22 हजार मेगावाट को पार कर गई थी। तब भी न्यूनतम मांग 15-16 हजार मेगावाट के आसपास बनी हुई थी। अब गर्मी बढ़ने के साथ जब बिजली की खपत तेजी से बढ़ती जा रही है तब अधिकतम मांग गिरकर 20 हजार मेेगावाट तक ठहर गई है। न्यूनतम और अधिकतम मांग में सिर्फ तीन हजार मेगावाट का अंतर बना हुआ है। कोयले की कमी के कारण परियोजनाओं से बिजली उत्पादन पर असर पड़ा है। इकाइयों को इस तरह से चलाया जा रहा है जिससे अतिरिक्त लोड पड़ने के कारण उनके बंद होने की स्थिति न आए। साथ ही स्टोर से कोयला भी कम से कम खर्च करना पड़े, ताकि वित्तीय संकट के हालात न बनें। बृहस्पतिवार को उत्पादन निगम की सबसे बड़ी 2630 मेगावाट वाली अनपरा परियोजना की सभी इकाइयां चलने के बाद कुल 2331 मेगावाट बिजली तैयार की गई। इसमें अनपरा-ए से 493, अनपरा बी से 886 और अनपरा डी से 952 मेगावाट शामिल है। वहीं ओबरा की 800 मेगावाट की परियोजना से 679 मेगावाट बिजली का उत्पादन हुआ।
19806 मेगावाट रही अधिकतम मांग
बिजली की मांग में लगातार इजाफा हो रहा है। बृहस्पतिवार को दर्ज की गई बिजली की अधिकतम मांग 19806 मेगावाट रही वहीं न्यूनतम मांग 16753 के पास पहुंच गई। इन आंकड़ों से बिजली की अधिकतम मांग में कमी करने के कारणों का पता लगाया जा सकता है।
कोल संकट होने से उत्पादन पर कुछ असर पड़ा है। फिर भी पूरी कोशिश है कि सभी इकाइयों को पूरी क्षमता से चलाकर बिजली तैयार की जाय, जिससे गर्मी में बढ़ी मांग को पूरा किया जा सके। - इं. आरसी श्रीवास्तव, सीजीएमए अनपरा तापीय परियोजना।