सूबे में पर्यटन के विकास के लिए सरकार ने ईको पर्यटन विकास बोर्ड के गठन की ओर कदम बढ़ाया है। इसके तहत ईको पर्यटन से जुड़े स्थलों को संरक्षित और सुसज्जित करने की तैयारी है। वहां पर्यटकीय सुविधाओं के विकास के साथ ही पर्यटकों को आकर्षित करने पर भी विशेष जोर रहेगा। सरकार की इस पहल से सोनांचल के पर्यटन को नई पहचान मिलने की संभावनाएं बढ़ गई है। यहां के पर्यटन स्थलों के विकास की वर्षों से दबे प्रस्तावों को भी शीघ्र मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
प्रकृति की नैसर्गिक सुंदरता की समृद्ध थाती होने के बाद भी पर्यटन के नक्शे पर पहचान पाने के लिए सोनभद्र लंबे समय से संघर्ष कर रहा हैं। कनहर के तट पर स्थित मिनी गोवा के नाम से चर्चित अबाड़ी और जोरुखाड़ जैसे पर्यटन स्थल हों या बेलन नदी पर निर्मित मुक्खा फॉल। ईको वैली में खड़े होकर ब्यूटी ऑफ सोन को निहारना और मारकुंडी में ईको प्वाइंट से घाटी विहंगम नजारा अद्भुत होता है। महुअरिया के घने जंगलों में काले हिरण को उन्मुक्त भाव से कुलांचे भरते देखना पूर्वांचल में कहीं और संभव नहीं है।
दुनिया का सबसे पुराना और बड़ा फॉसिल्स पार्क भी यहां है तो चंद्रकांता के तिलिस्मी किस्से को बयां करने वाला विजयगढ़ किला भी। रिहंद बांध, ओबरा बांध, हाथीनाला बायो डायवर्सिटी पार्क सहित ढेरों पर्यटन स्थल हैं जो पर्यटकों का मन मोहने की पूरी क्षमता रखते हैं। प्रचार-प्रसार व सुविधाओं के अभाव में यहां पर्यटकों का नियमित आना नहीं हो पाया। वर्षाकाल में कुछ समय के लिए यहां पर्यटकों की भीड़ बढ़ती है लेकिन उपयुक्त संसाधनों की कमी से वह यहां से स्थायी रूप से जुड़ नहीं पाते। इन पर्यटन स्थलों के विकास की लंबे समय से मांग उठती रही है। टूरिस्ट फेसिलिटी सेंटर, फूट सेंटर, कम्यूनिटी हॉल, हट, सामुदायिक शौचालय, आरओ प्लांट सहित अन्य सुविधाओं के लिए प्रस्ताव भी बने लेकिन बजट के अभाव में फाइलों में दबकर रह गए। अब ईको पर्यटन विकास बोर्ड के गठन के बाद इन प्रस्तावों पर काम होने की उम्मीद बढ़ी है। ईको पर्यटन के लिहाज से सोनभद्र में पूर्वांचल में सबसे मुफीद जगह भी है।
सोनभद्र में ईको पर्यटन के विकास की भरपूर संभावनाएं हैं। पूर्व में इससे जोड़कर कई प्रस्ताव भी बनाए गए हैं लेकिन किन्हीं कारणों से उन्हें मंजूरी नहीं मिल सकी है। ईको पर्यटन के लिए अलग से विकास बोर्ड बनता है तो निश्चित रूप से इसका बड़ा लाभ इस जिले को मिलेगा। पर्यटन के नक्शे पर सोनभद्र की नई पहचान होगी। -बृजेश यादव, पर्यटन सूचना अधिकारी।