जलभराव की समस्या से जूझते नगर को इस बार की बारिश में भी राहत नहीं मिलने वाली। बारिश में फिर से सड़के जलमग्न होगी। दरअसल, जलनिकासी के लिए बन रहे नाले का काम इतना धीमा है कि बारिश से पहले उसे पूरा होने की कोई उम्मीद नहीं है। अफसरों की बार-बार हिदायतों के बाद भी कार्यदाई संस्था काम को गति नहीं दे पा रही। इसका खामियाजा नगर के लोगों को भुगतना होगा।
राबर्ट्सगज नगर पालिका क्षेत्र के लोगों को जल निकासी की समस्या से निजात दिलाने के लिए करीब 37 करोड़ की लागत से नाले का निर्माण कराया जा रहा है। राबर्ट्सगंज नगर से नाला का निमार्ण सरोई नदी लसड़ा तक बनना है। पूर्व में बने नाला जहां क्षतिग्रस्त है उसकी मरम्मत कराते हुए साफ-सफाई कराया जाना है। करीब डेढ़ वर्ष पहले ही यह कार्य स्वीकृत हो चुका है। सीएंडडीएस को कार्यदाई संस्था नामित करते हुए शासन स्तर से 945.5 लाख रुपये अवमुक्त हो चुके हैं। दो बार टेंडर भी हुआ, लेकिन तकनीकी खामियों के कारण उसे रद्द करना पड़ा। यह कार्य वर्ष 2022 में बारिश से पहले ही पूरा कर लिया जाना था। लोगों को उम्मीद थी कि समय से काम होगा तो उन्हें इस बार बारिश में जलभराव से नहीं जूझना होगा। जिम्मेदारों की उदासीनता का हाल यह है कि अब तक दस प्रतिशत ही काम पूरा हो पाया है। पिछले माह सदर विधायक भूपेश चौबे की मौजूदगी में विभागीय अधिकारियों ने नगर का सर्वेक्षण किया था। विधायक ने संबंधितों को युद्धस्तर पर नाला का निर्माण कार्य कराने का निर्देश दिया था। इसके पहले डीएम समेत कई अधिकारी भी संबंधितों को शीघ्र कराने का निर्देश दे चुके हैं। बावजूद काम की गति नहीं बढ़ पाई है। नाला निर्माण की धीमी गति से लोगों में मायूसी है।
घरों में घुस जाता है बारिश का पानी
राबर्ट्सगंज नगर पालिका क्षेत्र में जल निकासी बड़ी समस्या है। इसके लिए यहां लाखों रुपये पहले भी खर्च हो चुके हैं, लेकिन जल निकासी का कोई मुकम्मल इंतजाम नहीं हो सका है। बारिश के मौसम में नगर की कई बस्तियों में लोगों के घरों में पानी घुस जाता है और सड़क पर भी पानी जमा हो जाता है। इससे लोगों को पैदल आवागमन में परेशानी झेलनी पड़ती है। घरों में पानी घुसने से जनजीवन अस्तव्यस्त हो जाता है, इससे निजात दिलाने के लिए नाला का निर्माण कराया जा रहा है।
नाला निर्माण के लिए 37 करोड़ रुपये मंजूर है। दो बार टेंडर रद्द होने व विभागीय अफसरों की सेवानिवृत्ति सहित अन्य दिक्कतों से काम शुरू करने में ही विलंब हुआ है। अब इसे जुलाई 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। तय समय से काम पूरा करा दिया जाएगा। -भाष्कर वर्मा, अवर अभियंता सीएंडडीएस।