कई बार आगाह करने के बाद भी औद्योगिक प्रतिष्ठानों की ओर से रिहंद डैम में अपशिष्ट का प्रवाह न रोके जाने पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सख्त रवैया अख्तियार किया है। एनजीटी ओवरसाइट कमेटी को सौंपी गई रिपोर्ट में चार परियोजनाओं से 4.36 करोड़ रुपये पेनाल्टी वसूलने की संस्तुति की गई है। रिहंद डैम प्रदेश ही नहीं, देश के ताप विद्युत उत्पादन का आधार स्तंभ है। मगर, औद्योगिक इकाइयों की ओर से प्रदूषण संबंधी मानकों का अनुपालन सही ढंग से न करने के कारण जलाशय के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।
विद्युत परियोजनाओं से राख धड़ल्ले से जलाशय में बहाया जा रहा है। अन्य इकाइयां भी अपने यहां के अपशिष्ट जलाशय में बहा रही हैं। इससे डैम की तलहटी में लगातार गाद जमा हो रही है। लगातार मिल रही शिकायतों के मद्देनजर अगस्त में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय निदेशक राजेंद्र डी पाटिल, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी राधेश्याम व दुद्धी एसडीएम रमेश कुमार की संयुक्त टीम ने डैम के विभिन्न इलाकों का दौरा किया था।
इस दौरान परियोजनाओं के अपशिष्ट निस्तारण में अनियमितता सामने आई थी। टीम के मुआयने में सामने आया था कि एनसीएल दुद्धीचुआ परियोजना की ईटीपी खराब है। बिजली घर से निकलने वाले राख के निस्तारण में अनपरा व ओबरा ताप परियोजनाएं मानक का अनुपालन नहीं कर रही हैं। इसके साथ ही हिंडाल्को रेणुकूट भी उत्सर्जित अपशिष्टों के निस्तारण में अनियमितता बरत रहा है। टीम ने चारों परियोजनाओं से 1.9-1.9 करोड़ रुपये क्षतिपूर्ति वसूलने की संस्तुति की है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तत्कालीन अधिकारी राधेश्याम ने बताया कि निरीक्षण के बाद स्थिति का आंकलन कर जुर्माने से संबंधित रिपोर्ट एनजीटी की ओवरसाइट कमेटी को भेजी गई है। वर्तमान क्षेत्रीय अधिकारी टीएन सिंह ने बताया कि मामला उनके कार्यकाल से पहले का है। वहां से निर्देश मिलते ही वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। जिन खामियों को दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए थे, परियोजनाओं की ओर से उसके अनुपालन की रिपोर्ट अभी नहीं आई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम आने पर भौतिक स्थिति जांची जाएगी और उसके परिप्रेक्ष्य में जरूरी कार्रवाई की जाएगी।
कोयला का संकट : अनपरा बी से उत्पादन घटाया
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम की सबसे बड़ी अनपरा परियोजना में कोयला संकट गहराता जा रहा है। लगातार कम होते स्टॉक को देखते प्रबंधन को बुधवार से परियोजना बी से भी 100 मेगावाट उत्पादन कम करना पड़ा। भुगतान न होने की वजह से कोल प्रदाता कंपनी एनसीएल ने रेल रैक से अनपरा परियोजना को कोयले की आपूर्ति रोक दी है।
इस समय सिर्फ परियोजना के एमजीआर से ही आवश्यकता से काफी कम कोयले की आपूर्ति की जा रही है। जबकि, 2630 मेगावाट क्षमता की अनपरा परियोजना की सभी सातों इकाइयां इस समय लोड पर हैं। नतीजतन सभी इकाइयों में कोयले का स्टॉक कम होता जा रहा है। परियोजना की तीनों इकाइयों को मिलाकर बुधवार को कोयले का स्टॉक एक लाख 10 हजार टन पहुंच गया।
कोयले की किल्लत को देखते हुए प्रबंधन ने पहले 630 मेगावाट क्षमता की ए परियोजना की तीनों इकाइयों से 120 मेगावाट उत्पादन कम कर दिया। इसमें 60 मेगावाट का और इजाफा करते हुए अब ए परियोजना से 180 मेगावाट उत्पादन कम कर दिया गया है। वहीं 1000 मेगावाट क्षमता की अनपरा बी परियोजना से भी बुधवार से 100 मेगावाट उत्पादन कम किया गया है।
6.72 मिलियन यूनिट बिजली का हो रहा नुकसान
अनपरा ए व बी से 280 मेगावाट उत्पादन कम किए जाने से प्रदेश को प्रतिदिन 6.72 मिलियन यूनिट बिजली का नुकसान उठाना पड़ रहा है। अगर कोयले की आपूर्ति की स्थिति में तत्काल सुधार नहीं हुआ तो नुकसान का यह आंकड़ा और भी बढ़ सकता है।