रविवार को मरीजों को दी गई सब्जी में लौकी की मात्रा कम रही जबकि आलू अधिक मिला। रसोई के बाहर न तो भोजन मिलने का समय निश्चित है और न ही मेन्यू चार्ट। सदर कोतवाली क्षेत्र के उआर गांव निवासी मुनिया देवी तीन दिन से जिला अस्पताल में अपने पति किशुन का इलाज करा रही हैं।
उन्होंने बताया कि आधा कटोरी सब्जी और दाल भी नहीं मिलती है। वहीं अपनी लड़की का इलाज करा रहे बीजपुर निवासी मुरारी ने भी भोजन की गुणवत्ता और मात्रा पर नाराजगी जाहिर की। दुद्धी निवासी नरेश भी दोपहर डेढ़ बजे तक भोजन का इंतजार करते रहे। धंधरौल निवासी मालती के परिजनों ने बताया कि दाल और सब्जी की गुणवत्ता ठीक नहीं है। पांच रोटी भी आधी पकी और जली हुई है।
जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए सुबह नाश्ते और दूध का कोई इंतजाम अस्पताल प्रशासन की ओर से नहीं किया गया है। मरीजों के उनके परिजन बाहर से नाश्ता खरीद कर लाते हैं। तब किसी तरह से मरीज दवा का सेवन करते हैं। कई मरीजों की आर्थिक स्थिति इतनी बेहतर नहीं होती कि वे अपने दम पर बाहर से नाश्ता खरीद सकें। ऐसे में वे बिस्किट खाकर दवा ले लेते हैं। भोजन भी समय से नहीं मिलता है कि वे दवा खा सके। यह व्यवस्था जिले के जनप्रतिनिधियों के बेहतर स्वास्थ्य के दावे को भी आइना दिखा रहा है।
मरीजों के लिए समय से भोजन उपलब्ध कराने के निर्देश दिये गये हैं। लापरवाही मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. क्रांति कुुमार सीएमएस, जिला अस्पताल।