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मंत्रियों की डांट बेअसर: मरीजों को मिल रही अधजली रोटी और आधी कटोरी दाल-सब्जी, सुबह का नाश्ता गायब

Sun, 08 May 2022 11:15 PM IST
वाराणसी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनभद्र

सार

एक ओर सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं पर भारी-भरकम रकम खर्च कर रही है तो दूसरी ओर विभागीय जिम्मेदार इस पर पलीता लगाने में जुटे हैं। 
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सोनभद्र जिला संयुक्त चिकित्सालय का हाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सोनभद्र जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को भोजन वितरण की व्यवस्था मंत्रियों की डांट के बाद भी नहीं सुधर पाई है। रविवार को भी दोपहर के भोजन में मरीजों को अधपकी रोटियां परोसी गई। आधा कटोरी दाल और आधा कटोरी सब्जी मिली। आलू-लौकी की सब्जी में से लौकी बस नाम की थी। भोजन का वितरण भी दोपहर डेढ़ बजे हुआ। मरीजों के तीमारदार व्यवस्था को दोष देते दिखे। उनका कहना था कि मंत्री जी क्या कर लेंगे, जब व्यवस्था ही गड़बड़ है।

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एक ओर सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं पर भारी-भरकम रकम खर्च कर रही है तो दूसरी ओर विभागीय जिम्मेदार इस पर पलीता लगाने में जुटे हैं। शनिवार को मंत्रियों के निरीक्षण के दौरान भोजन व्यवस्था में खामी मिली थी। इसमें सुधार के निर्देश दिए गए थे।

इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन और रसोई संचालित करने वाले ठेकेदार पर कोई असर नहीं हुआ। रविवार को दोपहर डेढ़ बजे भोजन वितरित किया गया। मेन्यू में मरीजों को हरी सब्जी देने का निर्देश है मगर जिम्मेदार हरी सब्जी के नाम पर सिर्फ कोरम पूरा करते हैं।

जिला संयुक्त चिकित्सालय में मरीजों का मिलने वाला खाना दिखाते मुरारी।- फोटो : SONBHADRA

 

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रविवार को मरीजों को दी गई सब्जी में लौकी की मात्रा कम रही जबकि आलू अधिक मिला। रसोई के बाहर न तो भोजन मिलने का समय निश्चित है और न ही मेन्यू चार्ट। सदर कोतवाली क्षेत्र के उआर गांव निवासी मुनिया देवी तीन दिन से जिला अस्पताल में अपने पति किशुन का इलाज करा रही हैं।

उन्होंने बताया कि आधा कटोरी सब्जी और दाल भी नहीं मिलती है। वहीं अपनी लड़की का इलाज करा रहे बीजपुर निवासी मुरारी ने भी भोजन की गुणवत्ता और मात्रा पर नाराजगी जाहिर की। दुद्धी निवासी नरेश भी दोपहर डेढ़ बजे तक भोजन का इंतजार करते रहे। धंधरौल निवासी मालती के परिजनों ने बताया कि दाल और सब्जी की गुणवत्ता ठीक नहीं है। पांच रोटी भी आधी पकी और जली हुई है।
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बाहर से लाना पड़ता है नाश्ता

जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए सुबह नाश्ते और दूध का कोई इंतजाम अस्पताल प्रशासन की ओर से नहीं किया गया है। मरीजों के उनके परिजन बाहर से नाश्ता खरीद कर लाते हैं। तब किसी तरह से मरीज दवा का सेवन करते हैं। कई मरीजों की आर्थिक स्थिति इतनी बेहतर नहीं होती कि वे अपने दम पर बाहर से नाश्ता खरीद सकें। ऐसे में वे बिस्किट खाकर दवा ले लेते हैं। भोजन भी समय से नहीं मिलता है कि वे दवा खा सके। यह व्यवस्था जिले के जनप्रतिनिधियों के बेहतर स्वास्थ्य के दावे को भी आइना दिखा रहा है।

मरीजों के लिए समय से भोजन उपलब्ध कराने के निर्देश दिये गये हैं। लापरवाही मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. क्रांति कुुमार सीएमएस, जिला अस्पताल।
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