ओबरा। देश भर में छाए कोयला संकट का सीधा असर ओबरा तापीय परियोजना के उत्पादन पर पड़ने लगा है। कोयले की कमी से बृहस्पतिवार को परियोजना की एक इकाई से उत्पादन बंद हो गया। एक इकाई तकनीकी खराबी के कारण बंद है। उत्पादनरत तीन इकाइयों को भी न्यूनतम लोड पर चलाया जा रहा है। परियोजना को मिलने वाले कोयले की आपूर्ति में सुधार नहीं होने पर आगामी दिनों में संकट गहरा सकता है
कोयले की कमी से प्रदेश में बिजली आपूर्ति पर असर पड़ा है। बिजली उत्पादन में कमी के साथ केंद्रीय पूल से मिलने वाली बिजली के कोटे में आई भारी कमी के कारण प्रदेश में पीक आवर के दौरान बिजली संकट की स्थिति पैदा हो जा रही है। कई जिलों में ग्रामीण और तहसील क्षेत्रों में जमकर अघोषित कटौती की गई। ओबरा तापीय परियोजना के मुख्य महाप्रबंधक इं.दीपक कुमार ने बताया कि परियोजना की पांचों इकाइयों के संचालन के लिए रोज करीब 13 हजार टन कोयले की आवश्यकता होती है। मौजूदा समय में महज दो रैक कोयला ही एनसीएल से मिल पा रहा है। ऐसी स्थिति में एक इकाई को बंद करना पड़ा है वहीं, तीन इकाइयों को मिनिमम लोड पर चलाया जा रहा है। स्टोरेज भी ढाई लाख टन की जगह बृहस्पतिवार को मात्र 40 हजार टन ही शेष रह गया है। कोयला आपूर्ति की स्थिति ऐसी ही बनी रही तो 10 दिनों में ओबरा तापीय परियोजना की सभी इकाइयों को बंद करना पड़ सकता है।