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ओबरा ग्राउंड रिपोर्ट : शिक्षा, स्वास्थ्य में अधूरी रही आस, विधायक गिना रहे विकास

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गिट्टी, बालू के खनन और कई बिजली परियोजनाओं के कारण पूरे प्रदेश में चर्चित ओबरा विधानसभा का सृजन वर्ष 2012 में हुआ। सबसे ज्यादा राजस्व देने के बावजूद यहां का जीवन काफी दुरुह है। आदिवासी बहुल इस क्षेत्र में प्रदूषण सबसे बड़ी समस्या है। पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य, सड़क, शिक्षा और शुद्ध पेयजल का अभाव अरसे से रहा है। मौजूदा विधायक और प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री संजीव कुमार गोंड का दावा है कि पिछले पांच वर्षों में इन बिंदुओं पर खूब काम हुए हैं। जल जीवन मिशन के जरिए हर घर जल योजना से जल्द ही शुद्ध पेयजल मिलने लगेगा। सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी वह कई उपलब्धियां गिना रहे हैं। हालांकि विपक्ष इससे सहमत नहीं है। उनका आरोप है कि खनन उद्योग पर रोक लगाकर भाजपा सरकार ने इस पूरे इलाके में बेरोजगारी का संकट बढ़ा दिया है। रेणुका नदी पर जो पुल वर्ष 2016 में ही स्वीकृत हो चुका था, उसका शिलान्यास पांच वर्ष बाद हुआ है। पक्ष-विपक्ष के इन दावों के बीच जनता वर्ष 2022 के लिए विधायक चुनने की तैयारी कर रही है। नगरीय क्षेत्र की अधिकता के बावजूद पिछले बार सबसे कम मतदान वाले इस क्षेत्र में अबकी खूब वोट बरसाने के लिए प्रशासन से लेकर सभी दल प्रयास में जुटे हैं।
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ओबरा विधानसभा क्षेत्र में शामिल इलाके
अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित इस सीट के अंतर्गत ओबरा, चोपन, रेणुकूट, पिपरी और अनपरा नगर पंचायत के अलावा चोपन और म्योरपुर ब्लाक का दूरस्थ क्षेत्र शामिल है।
विधायक निधि से खर्च हुए आठ करोड़
बीते पांच वर्षों में विधायक निधि से 06 करोड़ रुपये मिले। इससे सीसी रोड, सोलर लाइट सहित अन्य विकास कार्य कराए गए। वर्ष 2020-21 की निधि कोरोना के कारण निरस्त रही।
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जनता के सुख-दुख में बराबर खड़ा रहा
पांच वर्ष के कार्यकाल में स्वास्थ्य, बिजली, शिक्षा, सड़कों, पेयजल सहित सभी क्षेत्रों में खूब काम हुए हैं। केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं को शत प्रतिशत जनता तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है। गरीबों को पक्के आवास, आयुष्मान कार्ड, सुदूर इलाकों में विद्युतीकरण सहित रपटा, पुलिया, सीसी रोड, नहरों की सफाई आदि कार्यों को कराकर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से जनता को लाभांवित किया गया है। अनपरा को नगर पंचायत का दर्जा दिलाया। अनपरा-शक्तिनगर का चौड़ीकरण पूरा हुआ। रेणुका नदी पर पुल बनना शुरू हो चुका है। विधायक निधि से तमाम ऐसे कार्य कराये गए जो लंबे समय से नहीं हो पा रहे थे। पूरे कार्यकाल में जनता के बीच रहकर उनके सुख-दुख का साथी बना रहा हूं। -संजीव कुमार गोंड, विधायक व राज्य मंत्री।
ओबरा सबसे ज्यादा राजस्व देने वाला क्षेत्र है, बावजूद उसके अनुरूप यहां विकास कार्य नहीं कराए गए हैं। पांच वर्ष तक खनन कार्य ठप रहने से हजारों लोग बेकार हुए हैं। बालू-गिट्टी के दाम आसमान पर पहुंच गए। स्वास्थ्य, शिक्षा और पेयजल की दिशा में भी कोई काम नहीं हुआ। मकरा में जब बीमारी से लोग मर रहे थे, तब विधायक लापता थे। पूरा सरकारी तंत्र मामले की लीपापोती में जुटा था। नए काम तो दूर वह काम भी नहीं हुए, जिनकी स्वीकृति सपा सरकार ने ही दे दी थी। इसमें रेणुका नदी का पुल सबसे महत्वपूर्ण है। सपा सरकार में ही धनराशि जारी होने के बाद इस काम नहीं कराया गया। अगर पुल बन गया होता तो रेणुकापार के कई गांवों के लोगों को बड़ी सहूलियत मिलती। -रवि गोंड बड़कू, सपा नेता व निकटतम प्रतिद्वंद्वी।
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