प्रदेश में चाहे बसपा की सरकार रही हो या सपा और भाजपा की, किसी भी सरकार में इस गांव तक विकास की किरण नहीं पहुंच सकी। गांव के रामजतन खरवार, सत्यनारायण सिंह और सुदामा सहित अन्य ग्रामीणों का कहना है कि कई बार क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और बिजली विभाग के अधिकारियों को गांव में बिजली की समस्या के संबंध में अवगत कराया गया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
ब्लॉक कार्यालय से करीब 45 किलोमीटर दूर इस गांव में जल्द अधिकारियों का आना-जाना नहीं होता है। इस वजह से भी वे अपनी समस्याओं से अधिकारियों से अवगत नहीं करा पाते हैं। ग्रामीणों की मानें तो वर्ष 2013 में गांव में बिजली के खंभे लगे थे लेकिन तार नहीं खींचा गया। इससे गांव में बल्ब जलाने का सपना साकार नहीं हो सका।
केरोसिन वितरण बंद कर दिए जाने के बाद से समस्या और बढ़ गई है। राबर्ट्सगंज खंड के एक्सईएन एसके सिंह ने कहा कि चौरा गांव में विद्युतीकरण के लिए सर्वे कराया गया है। आचार संहिता की वजह से काम शुरू नहीं हो सका। चुनाव बाद गांव में विद्युतीकरण करा दिया जाएगा।
चौरा गांव के कुछ लोग अपने घरों में सोलर लाइट लगवा रखे हैं। सोलर लाइट के जरिए मोबाइल चार्ज करते हैं। आसमान में बदली होने और बैटरी चार्ज न होने की स्थिति में प्रकाश की दिक्कत होती है। ग्रामीणों ने बिजली विभाग के अधिकारियों से विद्युतीकरण कराने की मांग की है।