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जीवन एक अधूरा वाक्य है... काव्य संग्रह का हुआ लोकार्पण

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राबर्ट्सगंज नगर पालिका परिषद सभागार में पुस्तक का विमोचन करते अतिथिगण।संवाद - फोटो : SONBHADRA
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मधुरिमा साहित्य गोष्ठी के संयोजन में कवि अरविंद चतुर्वेदी के नव प्रकाशित काव्य संग्रह ‘जीवन एक अधूरा वाक्य है’ का रविवार को लोकार्पण हुआ। नगर पालिका सभागार में हुए कार्यक्रम में वक्ताओं ने काव्य संग्रह की खूबियों पर विस्तार से चर्चा की।
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अध्यक्षीय संबोधन में कवि व चिंतक पं. अजय शेखर ने कहा कि यह काव्य संग्रह लोक मन लोक जीवन और लोक चिंतन से उपजी लोक अभिव्यक्ति है, जो लोक जगत पर आधारित है। अरविंद चतुर्वेदी की रचनाएं यथार्थ बोध पर टिकी हुई हैं और भोगा हुआ यथार्थ इस कृति में उभरकर सामने आया है। यह ऐसा यथार्थ है जिसकी अभिव्यक्ति उद्बोधन में भी है और आवाहन में भी। जीवन को समझने के लिए इनकी रचनाएं अनेक अर्थ देती हैं। कथाकार लेखक रामनाथ शिवेंद्र ने कहा कि जीवन आंतरिक और वाह्य प्रलय का लय है। जो जीवन में कार्य के प्रति समर्पित रहता है वही जीवन में मूल को ढूंढने का प्रयास करता है। पारसनाथ मिश्र ने कहा कि यह काव्य कृति जीवन यात्रा की गहराइयों से उपजा गहरा चिंतन है। संत कीनाराम पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गोपाल सिंह, मिथिलेश प्रसाद द्विवेदी, ओमप्रकाश त्रिपाठी, नरेंद्र नीरव, विजय शंकर चतुर्वेदी, रमेश देव पांडेय, राकेश शरण मिश्र, प्रदुम्न त्रिपाठी, प्रभात सिंह चंदेल, खुर्शीद आलम, सरोज सिंह, सुरेश तिवारी, दीपक केसरवानी, डॉ. कुसुमाकर, प्रमोद कुमार श्रीवास्तव, अमरनाथ अजेय आदि मौजूद रहे। संचालन अशोक तिवारी ने किया।
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