संसद के शीतकालीन सत्र में बिजली के निजीकरण के लिए लाए जा रहे इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) 2021 के विरोध में स्थानीय ओबरा तापीय परियोजना पर भी विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले बिजली कर्मियों ने विरोध सभा की। वक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार निजीकरण की दृष्टि से संसद के शीतकालीन सत्र में इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2021 संसद में रखने और पारित करने जा रही है। इसका बिजली कर्मियों व बिजली उपभोक्ताओं पर व्यापक प्रतिगामी प्रभाव पड़ने वाला है।
उन्होंने कहा कि बिल पर बिजली कर्मियों व बिजली उपभोक्ताओं से कोई राय नहीं ली गई है। केवल औद्योगिक घरानों से ही विचार विमर्श किया गया है। इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 में उत्पादन का लाइसेंस समाप्त कर बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन का निजीकरण किया गया जिसके परिणाम स्वरूप जनता को महंगी बिजली की मार झेलनी पड़ रही है। अब इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2021 के जरिये बिजली वितरण का लाइसेंस लेने की शर्त समाप्त की जा रही है जिससे बिजली वितरण के संपूर्ण निजीकरण का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा। सभा को प्रमुख रूप से शशिकांत श्रीवास्तव, अंकित प्रकाश, अदालत वर्मा, अजय सिंह, नवीन चावला, अभय प्रताप सिंह, दिनेश यादव, रामयज्ञ मौर्य, लालचंद, राजबहोर पटेल, शाहिद अख्तर, दीपक सिंह, अंबुज सिंह, उमेश सिंह, विजय सिंह, कैलाश नाथ ने संबोधित किया। अध्यक्षता अदालत वर्मा ने की। संचालन योगेंद्र प्रसाद ने किया। इं सुरेश, आरके सिंह, बालमुकुंद यादव, मेहंदी हसन, मनोज कुमार, कमलेश कुमार, वीपीएस कुशवाहा, पशुपति नाथ विश्वकर्मा, दीपू गोपीनाथन, श्रीजीत, अरुण कुमार सिंह, प्रह्लाद शर्मा, उमेश कुमार, प्रभात पांडेय, पुष्कर सिंह, ऋषि कुमार, दुर्गा मिश्रा, पूनम, मंजू, प्रदीप कन्नौजिया, दिनेश चौरसिया, लालता तिवारी, राकेश श्रीवास्तव, बीडी विश्वकर्मा आदि मौजूद रहे।