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श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं सुन श्रद्धालु हुए मंत्रमुग्ध

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असनहर गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथा व्यास आचार्य भृगुभूषण जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं व गोवर्धन पूजा की कथा का वर्णन किया। श्रीकृष्ण की माखन चोरी, व्योमासुर वध कर वायु और आकाश तत्व का शोधन के प्रसंग सुनकर भक्त भाव विभोर हो गए।
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गोवर्धन पूजा का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि अगर भगवान के भक्तों में विकार आ जाता हैं तो वे अपने भक्तों की रक्षा को उसके अहंकार के अंकुर को नष्ट कर देते हैं। इंद्रदेव का उदाहरण देते हुए बताया कि एक बार उन्हें अहंकार हो गया था, तब श्रीकृष्ण ने मार्गदर्शन कर इंद्र की पूजा न कराकर गिरिराज की पूजा कराई थी। वहीं माखन चोरी के प्रसंग में बताया कि प्रभु माखन इसलिए खाते थे क्योंकि माखन का अर्थ क्रोध तथा न का अर्थ नहीं है। यानि जो क्रोधादि विकारों से रहित है वह कन्हैया को अत्यंत प्रिय है। संगीत कारों की टीम ने अमृतमय वाणी से कई सुंदर भजन सुनाकर भक्तों को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। मुख्य यजमान इंद्रबहादुर तिवारी, आशा तिवारी, विकास तिवारी, उर्मिला तिवारी, आशीष तिवारी, पूजा तिवारी, कामेश्वर प्रसाद, रामेश्वर प्रसाद, बालकृष्ण तिवारी, संजय कुमार, सरोज कुमार सहित सैकड़ों की संख्या में लोग कथा ज्ञान का श्रवण किया।
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