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Sonebhadra News: सोलर प्लांटों की बैटरी खराब, अब नहीं मिलेगी सस्ती बिजली

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जिले के 14 गांवों के आदिवासियों को अब सस्ती बिजली नहीं मिलेगी। अपने घरों को रोशन करने के लिए उन्हें अब अधिक शुल्क अदा करना होगा। इन गांवों में लगे सोलर प्लांटों की बैटरी खराब हाेने की वजह से ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है। सोलर प्लांट की बैटरी बदलने से विभाग ने हाथ खड़े कर दिए हैं। लिहाजा अब उन्हें घर रोशन करने के लिए बिजली विभाग से कनेक्शन लेना होगा।
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जिले के सुदूर क्षेत्रों में आदिवासियों के घर रोशन करने के लिए शासन की तरफ से दी सेंट्रलाइजेशन डिस्ट्रीब्यूशन जनरेशन (डीडीजी) योजना के तहत वर्ष 2015-16 में चोपन ब्लॉक के चोरपनिया सहित 14 गांवों में सोलर प्लांट की स्थापना कराई गई थी। सोलर प्लांटों के जरिए आदिवासियों को सिर्फ दो रुपये प्रतिदिन के हिसाब से बिजली मुहैया कराया जाता था।
यह शुल्क कार्यदायी फर्म अभिषेक सोलर प्राइवेट लिमिटेड रांची को प्लांटों की देखभाल के लिए लिया जाता था। पांच साल तक सोलर प्लांटों का देखभाल कार्यदायी फर्म को ही करना था। आठ से नौ साल पुराने लगे सोलर प्लांट में लगे बैटरी की वैधता जुलाई 2021 में समाप्त हो गई।
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इस नाते अब करीब 750 से अधिक आदिवासी परिवारों को इन सोलर प्लांटों से बिजली नहीं मिल रही है। ऐसे में आदिवासी परिवार अब बिजली कनेक्शन कराकर बिजली का उपभोग करने को विवश हैं।

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750 से अधिक ग्रामीणों को मिल रही थी बिजली

आदिवासी क्षेत्र में लगाए गए 14 सोलर प्लांट से 750 से अधिक ग्रामीण बिजली कनेक्शन लिए हुए थे। इसमें म्योरपुर ब्लॉक में जूरा गांव में 30 कनेक्शन, विश्रामपुर में 44, कोरवनटोला में 33, बहरपान में 23, करचाटोला में 65, घोरावल ब्लॉक के उभ्भा गांव में 85, जिन्हौरा में 22, सपही में 60 वहीं नगवां ब्लॉक के धोराघर गांव में सर्वाधिक 100 लोगों ने कनेक्शन लिया था। इसी तरह दुद्धी ब्लॉक के डालापीपर में 46, बभनी ब्लॉक के करमघट्टी में 70 और मझौली में 62, चोपन ब्लॉक के चोरपनिया में 55 और नदहरी में 56 ग्रामीणों ने कनेक्शन लिया हुआ था। इन गांवों में 4 किलोवॉट से लेकर 32 किलोवॉट तक के सोलर प्लांट लगाए गए हैं।



बैटरी लगाने में खर्च आ रहा ज्यादा

जिले के जिन आदिवासी गांवों में सोलर प्लांट लगाया गया है, उनकी बैटरी पांच साल में खराब हो गई है। दोबारा बैटरी लगाने में ज्यादा खर्च आ रहा है। ऐसे में विभाग इन सोलर प्लांटों का बैटरी बदलने से हाथ खड़ा कर दिया है। ऐसे में आदिवासी परिवार के सामने घर रोशन करने के लिए बिजली कनेक्शन कराना पड़ रहा है। चोरपनिया गांव के बबलू, श्रीप्रकाश, लल्लू आदि का कहना है कि वह बिजली का कनेक्शन करा रहे हैं।
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