राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशन में शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 37940 वादों का निस्तारण हुआ। इसमें दस करोड़ से अधिक की धनराशि की वसूली और प्रतिकर के रुप में जमा कराया गया। न्यायिक अधिकारियों ने सुलह-समझौतों से विवादों के निस्तारण पर जोर दिया।
इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति व प्रशासनिक अधिकारी डॉ. गौतम चौधरी ने कचहरी परिसर में दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि न्यायालयों में मुकदमों की संख्या इस कदर बढ़ गई है कि लोगों को समय से न्याय मिलने में दिक्कत आती है। बैंक व राजस्व अधिकारी सकारात्मक सोच के साथ वादकारियों को सुलह समझौते के आधार पर अधिक से अधिक लाभ दे सकते हैं। लोक अदालतों का सबसे बड़ा गुण निशुल्क और त्वरित न्याय है।यह विवादों के निपटारे का वैकल्पिक माध्यम है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश का कोई भी नागरिक आर्थिक या किसी अक्षमता के कारण न्याय पाने से वंचित न रह जाए। नोडल अधिकारी निहारिका सिंह चौहान ने कहा कि लोकतंत्र का महापर्व राष्ट्रीय लोक अदालत है। इस पर्व में बिना किसी श्रम और धन के आपसी सौहार्दपूर्ण तरीके से वादों का निस्तारण भी होता है और किसी भी पक्षकारो की हार-जीत नहीं होती। कार्यक्रम में जनपद न्यायाधीश अशोक कुमार प्रथम, अपर जनपद न्यायाधीश संजीव कुमार त्यागी, संजय हरि शुक्ला, पंकज कुमार सहित अन्य न्यायिक अधिकारी व अधिवक्ता मौजूद रहे।