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सिक्का लेने से किया था इंकार, अब होगी एफआईआर

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सोनभद्र। भारतीय रिजर्व बैंक के स्पष्ट निर्देश के बाद भी दस रुपये और एक-एक रुपये के छोटे सिक्कों को न लिए जाने की शिकायत आम हो गई है। बस में यात्रा के दौरान सिक्का न लिए जाने के ऐसे ही मामले में एसीजेएम कोर्ट ने ओबरा पुलिस को बस कंडक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विवेचना का आदेश दिया है। मामले में सिक्का न लेने, अपशब्दों का इस्तेमाल करने, शिकायत के बाद भी पुलिस द्वारा कार्रवाई न किए जाने का आरोप है।
ओबरा निवासी अधिवक्ता हरिओम सेठ व अधिवक्ता नित्यानंद द्विवेदी ने 29 जनवरी को सीजीएम कोर्ट में धारा 156(3) के तहत प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। उनका कहना था कि तीन नवंबर को जिला कचहरी से खाली होकर ओबरा जाने के लिए धनंजय टूरिस्ट एसी बस कोच में सवार हुए। रास्ते मेें उन्होंने कंडक्टर शंभू निवासी ओबरा को दस रुपये के तीन नोट के साथ दस का एक सिक्का और एक-एक का पांच छोटा सिक्का दिया। उसने सिक्का लेने से मना कर दिया। जब हरिओम ने एतराज जताया तो कंडक्टर ने अपशब्द कहकर अपमानित किया। सौ नंबर डायल कर शिकायत की तो पुलिस शंभू को पकड़कर थाने ले गई लेकिन बिना कार्रवाई किए ही दो दिन बाद उसे छोड़ दिया गया। पुलिस से एतराज जताने पहुंचे तो ओबरा थाने के एक दारोगा ने उन्हेें ही कार्रवाई की धमकी दे डाली। हरिओम का कहना था कि कंडक्टर का यह कृत्य भारतीय रिजर्व बैंक के अधिनियम की धारा 26(2) का उल्लंघन है। इस पर कोर्ट ने इसे संज्ञेय मामला मानते हुए पिछले सप्ताह ओबरा पुलिस को मुकदमा पंजीकृत कर विवेचना करने का आदेश पारित कर दिया।
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क्या कहती है आरबीआई की धारा 26 (2)
सोनभद्र। भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम 1934 की धारा 26 की उपधारा (2) मेें निहित प्रावधानों के अनुसार कोई भी शख्स भारतीय मुद्रा लेने से मना नहीं कर सकता है। अगर वह ऐसा करेगा तो उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 124 ए के तहत देशद्रोह का केस दर्ज कराया जा सकता है।
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