रेउसा/तंबौर/रामपुर मथुरा/ (सीतापुर)। तराई इलाके में शारदा व सरयू नदी ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। जलस्तर बढ़ने से नदियां खतरे के निशान से पांच सेंटीमीटर ऊपर बह रही हैं। तंबौर इलाके में पानी के तेज बहाव में बंधा कट गया। इससे पांच गांवों के अंदर तक पानी पहुंच गया है। 20 गांवों के संपर्क मार्ग कट जाने से लोगों को आवागमन में दिक्कतें उठानी पड़ रही है। हैंडपंप पानी में डूब जाने से शुद्ध पानी का भी संकट खड़ा हो गया है।
जिले में महमूदाबाद, लहरपुर व बिसवां तहसील बाढ़ की चपेट में आ गई है। इन तहसीलों के 50 से अधिक गांवों में दो से तीन फिट तक पानी भरा हुआ है। बुधवार को नदियों का जलस्तर बढ़ने से लोगों की मुसीबतें कई गुना बढ़ गई है। तंबौर इलाके में नदी के किनारे बसे गांव बसंतापुर से कोल्हुआपुरवा तक सिंचाई विभाग द्वारा बाढ़ व कटान से बचाव के लिए बनवाया गया बंधा पानी के तेज बहाव में करीब 20 मीटर कट गया है।
जिससे इस क्षेत्र में पड़ने वाले देवपालपुर, कोल्हुआपुरवा, मुरब्बा, बसंतापुर तक पानी बढ़ता जा रहा है। सिंचाई विभाग चाहकर भी मरम्मत नहीं करा सकता है। अब अफसर पानी कम होने की राह देख रहे है। अगर बंधे में दरारें और पड़ी तो क्षेत्र में पड़ने वाले गांवों में बाढ़ से तबाही मच सकती है।
बरक्षता, बरेला, बोधवा, बड़रिया, हनुमान सिंहपुरवा, लीलापुरवा, रजनापुर, शिवपुर व नदी के बीच बसे मीतमऊ, नकहा, परेवा में पानी तबाही मचा रहा है। अभी तक तटवर्ती गांवों में कोई सरकारी मदद नहीं पहुंची है। गांवों के सरकारी नल पानी में डूब गए है। इससे यहां पर पीने के पानी की समस्या उत्पन्न हो गई है। इन गांवों के जलमग्न संपर्क मार्गों में बड़े-बड़े कट बन जाने से लोगों का आवागमन बंद है।
बाढ़ का सुजावलपुर होकर जायजा लेने गए उप जिलाधिकारी लहरपुर इन हालातों के कारण किसी गांव तक नहीं पहुंच सकें। तहसीलदार लहरपुर मदन मोहन वर्मा ने बताया कि बाढ़ प्रभावित मीतमऊ व परेवा के 200 परिवारों को बाढ़ राहत सामग्री वितरित की गई। अंगरौरा, अर्जुनपुरवा, बलेसरपुरवा, सोंतीपुरवा, हरीपुरवा आदि सहित करीब 16 गांवों का संपर्क नाव के बगैर संभव नहीं बचा है।
कुछ रास्तों के ऊपर पानी बह रहा है। अखरी गांव को जाने वाले संपर्क मार्ग पर भी काफी तेज बहाव होने से आवागमन खतरे से खाली नहीं है। पानी अधिक होने के कारण जानवरों के लिए चारे, शौचालय, बिजली व पेयजल आदि की समस्याएं उत्पन्न हो गई है। रेउसा के म्योढ़ी छोलहा व गोलोक कोडर ग्राम पंचायतें के 34 मजरे पानी में जलमग्न है। हर तरफ पानी दिखाई दे रहा है। लोग किसी तरह नावों का इंतजाम करके आवागमन कर रहे है। तहसीलदार बिसवां अभिचल प्रताप सिंह ने बताया बाढ़ पीड़ितों को मदद पहुंचाई जा रही है।
ग्रामीणों ने तटबंध पर डाला डेरा
महमूदाबाद तहसील के फत्तेपुरवा में लगे मीटर गेज में नदी का जलस्तर खतरे के निशान 119 सेंटीमीटर से पांच सेंटीमीटर अधिक पर आ गया है। नदी के तटवर्ती गांवों के लोग तटबंध पर त्रिपाल और पॉलीथिन के नीचे जीवनयापन कर रहे है।
नदी के किनारे बसे गांव अखरी, अंगरौरा, फतेपुरवा, कनरखी, कटुवा घाट, बिंद्रापुरवा, बगस्ती, श्रीचंद्र कोठार, शुकुलपुरवा, शंकरपुरवा, हरीपुरवा, अर्जुनपुरवा, बंगालीपुरवा, हरिहरपुरवा, केवड़ा, बलेसरपुरवा, सोंतीपुरवा सहित करीब 25 गांवों में पानी भरा हुआ है। ग्रामीण सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर पलायन कर रहे है।
एडीएम ने लिया जायजा
एडीएम विनय पाठक बुधवार को बाढ़ के हालातों का जायजा लेने के लिए रामपुर मथुरा विकासखंड के सबसे प्रभावित गांव अखरी पहुंचे। एडीएम ने वहां पर हालात का जायजा लिया। एसडीएम से ग्रामीणों को मिल रही मदद के बारे में जानकारी हासिल की। एडीएम ने एसडीएम को सभी बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री हर हाल में वितरित करने के निर्देश दिए। लेखपालों को गांवों में बराबर लोगों की समस्याओं के निस्तारण की हिदायत दी।