अमावस्या पर धार्मिक एवं पौराणिक तीर्थ स्थल नैमिषारण्य चक्रतीर्थ समेत गोमती नदी में लाखों श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई और विभिन्न मठ व मंदिरों में जाकर देवी-देवताओं के दर्शन किए। बाद में उनसे सुख समृद्धि की मन्नत मांगी।
हर अमावस्या पर नैमिषारण्य तीर्थ स्थल पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। सोमवार देर शाम से ही दूरदराज से बसों व ट्रेनों से श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंचने लगी थी।
देर रात को नैमिषारण्य में नजारा देखने वाला था। मंगलवार भोर बारिश से कुछ देर तक दर्शनार्थियों को परेशानी हुई लेकिन आस्था मौसम पर भारी पड़ी। दिन चढ़ने के साथ श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा हुआ। श्रद्धालुओं ने नैमिषारण्य चक्रतीर्थ समेत गोमती नदी में स्नान किया। बाद में श्रद्धालुुओं ने ललिता देवी मंदिर, हनुमानगढ़ी, पांच पाण्डव किला, व्यास गद्दी, कालीपीठ, सूतगद्दी एवं देवपुरी समेत आदि मंदिरों व मठों में जाकर देवी-देवताओं के दर्शन किए।
प्रमुख तीर्थ पंच प्रयाग एवं काशीकुंड की सफाई व्यवस्था बदहाल है। अमावस्या पर्व को लेकर यहां के कुंडों के जल को साफ न होने से श्रद्धालुओं को गंदे पानी में ही स्नान करना पड़ा। साथ ही उन्हें दूषित पानी से भी आचमन करने को मजबूर होना पड़ा।
प्रशासन को मेले को व्यवस्थित संपन्न कराने में खासी मशक्कत करनी पडी़। कोतवाल मिश्रिख एवं चौकी प्रभारी नीमसार पुलिस बल के साथ मेले की सुरक्षा व्यवस्था देखते रहे।
मेला परिसर में न तो पालिका द्वारा और नही कि सामाजिक संगठन द्वारा प्याऊ की कोई व्यवस्था नहीं की गई। प्यास से लोग त्राहि-त्राहि कर रहे थे। मेले में पीने के पानी की किल्लत से लोगों का बुरा हाल था।