महोली क्षेत्र में मंगलवार को कांबिंग करते वनकर्मी। - संवाद
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महोली (सीतापुर)। इलाके में डेढ़ माह से दहशत का पर्याय बना बाघ वन विभाग की पकड़ से दूर है। बाघ पिजड़े के इर्द-गिर्द ही चहलकदमी कर रहा है लेकिन वन विभाग की ओर से लगाए गए पिंजड़े में नहीं फंस पा रहा है। ऐसे में वन कर्मियों के लिए मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। सोमवार देर रात बाघ पिंजड़े के करीब से आकर लौट गया। मंगलवार को कांबिग के दौरान पिंजड़े के पास मिले पग चिह्नों से इसकी पुष्टि हुई है। इससे दहशत और बढ़ गई है।
चंद्रा गांव के निकट जनवरी में बाघ के पग चिह्न देखे गए थे। बाघ को पकड़ने के लिए जंगल में पिंजड़ा लगाया गया था। बाघ पिंजड़े के करीब तक तो आया, लेकिन वापस चला गया। इसी दौरान फरवरी में मोगा ढाबा के निकट बाघ के पग चिह्न मिले थे। जिस पर वन विभाग ने 17 फरवरी को पिंजड़ा कारेदेव मंदिर के निकट जंगल से हटाकर मोगा ढाबा के पीछे लगाया गया था। फिर भी बाघ पिजड़े में शिकार के लिए नहीं पहुंचा। सोमवार को एसडीओ एके मिश्रा ने वन कर्मियों के साथ क्षेत्र मे कांबिंग कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए थे।
वन रेंजर सीके पांडे ने बताया कि मंगलवार को कांबिंग के दौरान मोंगा ढाबा के पीछे पिंजड़े के करीब दो मीटर पर बाघ के पग चिह्न मिले हैं। इससे कयास लगाया जा रहा है कि बाघ पिंजड़े के आसपास ही चहलकदमी कर रहा है। पिजड़े के करीब तक तो आता है, लेकिन वह शिकार के लिए पिंजड़े तक नहीं पहुंच रहा है। जबकि लगातार पिंजड़े में रात को शिकार के लिए बकरे को बांधा जा रहा है।
वन रेंजर साजिद अली व रेंजर महोली की ओर से टीम के साथ क्षेत्र में कांबिंग की है जा रही है। नए पग चिह्न मिलने के बाद अब इलाके में बाघ की मौजूदगी को लेकर दहशत और बढ़ गई है।