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...तो इस बार भी बाढ़ का दंश झेलेंगे ग्रामीण

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तंबौर के रतनगंज में स्टड व जियोट्यूब परियोजना में ठप पड़ा कार्य। - संवाद - फोटो : SITAPUR
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तंबौर/सीतापुर। तराई इलाके में गांवों को शारदा व सरयू नदी की कटान से बचाने के लिए तीन परियोजनाएं चल रही हैं। इनकी धीमी रफ्तार से ग्रामीण चिंतित है। डीएम ने 15 जून तक काम पूरा करने के अल्टीमेटम दिया था। पर तय समय में काम पूरा होता दिख नहीं रहा है। बढ़ईनपुरवा में बोरियों की कमी से काम बंद है। ऐसे में बाढ़ की आशंका से ग्रामीणों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं।
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जनपद में प्रति वर्ष शारदा व सरयू नदी उफनाने से बाढ़ आती है। इसकी चपेट में लहरपुर, बिसवां व महमूदाबाद तहसील के सैकड़ों गांव आ जाते है। ग्रामीणों को कटान से बचाने के लिए इस बार तीन परियोजनाओं पर काम शुरू किया गया है। विकासखंड बेहटा के शारदा नदी के किनारे बसे ग्राम बरक्षता, लीलापुरवा, बरेला, हनुमान सिंह पुरवा को कटान से बचाने के लिये पांच करोड़ 72 लाख की लागत से 1305 मीटर में 29 स्टड बनाए जाने है।
बालकराम, कैलाशनाथ, राम बहोरी, अमर सिंह व रामू शर्मा बताते हैं कि अभी तक 10 स्टड का काम ही पूरा हो सका है।
दूसरी परियोजना विकासखंड रेउसा के ग्राम रतनगंज में शारदा नदी के किनारे चल रही है। करीब एक किलोमीटर तक जियो ट्यूब व स्टड निर्माण होना है। ग्रामीणों ने बताया कि धीमी गति से काम हो रहा है।
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ग्रामीण बोले - डीएम से की थी शिकायत, नहीं हुई सुनवाई
रेउसा के ही शारदा नदी की तलहटी में बसे शेखूपर, कम्हरिया, बढ़ईनपुरवा, पसियानपुरवा, खालेपुरवा को कटान से बचाने के लिये साढ़े आठ करोड़ की लागत से 945 मीटर की लंबाई में 21 स्टड व पिचिंग का कार्य होना है। बढ़ईनपुरवा में बोरियों की कमी के चलते कई दिन से काम बंद है। बाढ़ के डर से नदी के किनारे बसे गांव के लोगों की धड़कनें तेज हो रही हैं।
कम्हरिया निवासी मथुरा प्रसाद अवस्थी ने बताया कि काम बंद होने के कारण 19 मई को जिलाधिकारी को शिकायती पत्र दिया था पर कोई सुनवाई नहीं हुई। हालांकि, डीएम अनुज सिंह व सांसद राजेश वर्मा ने कुछ दिन पहले यहां निरीक्षण कर 15 जून तक सभी परियोजनाएं पूरा करने की हिदायत दी थी। ग्रामीणों का कहना है कि अगर इसी रफ्तार से काम चलता रहा तो यह जून तक पूरा नहीं हो पाएगा। इससे इस साल भी बाढ़ का कहर झेलना पड़ सकता है।
हालात जस के तस
ग्रामीण शिवाकांत ने बताया कि गांव को बचाने के लिये यह तीसरी परियोजना आई है। फिर भी हालात जस के तस हैं। पिछले साल बाढ़ का कहर झेला था। इस बार भी झेलना पड़ सकता है। कुलदीप मिश्रा का कहना है कि आधे से ज्यादा स्टड अभी अपूर्ण हैं। जिससे समय के अंदर काम पूरा न होने से खौफ बढ़ रहा है। इससे ग्रामीणों ने अभी से बाढ़ से निपटने के लिए तैयारी शुरू कर दी है। सुशील कुमार का कहना है कि कटान रोधी परियोजना में आरपार पिचिंग होनी है। उसके पूर्ण न होने से कई गांव बाढ़ की चपेट में आ जाएंगे।
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