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दो साल से बिना फिटनेस फर्राटा भर रहे स्कूली वाहन

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सीतापुर। इसे लापरवाही कहें... मनमानी... या फिर अनदेखी? कुछ भी हो, लेकिन स्कूल वाहनों की फिटनेस कराने में शिक्षण संस्थान ही लापरवाह और मनमाना रवैया अख्तियार नहीं किए हैं बल्कि परिवहन विभाग के अफसर भी जिम्मेदार हैं। जांच में सामने आया कि दो साल से स्कूली वाहनों की फिटनेस तक नहीं कराई गई। जरूरत महसूस होने पर स्कूलों को नोटिस भेजकर औपचारिकताएं पूरी कर लीं गईं, लेकिन अब गाजियाबाद में हुई घटना के बाद परिवहन विभाग की नींद टूटी है। सख्ती दिखाई जा रही है।
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पिछले दिनों गाजियाबाद के मोदीनगर में स्कूल बस से बाहर झांकते समय कक्षा चार के छात्र की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस हादसे के बाद सरकार गंभीर हुई। जिले से स्कूली वाहनों की जांच कर रिपोर्ट मांगी। इस मामले को लेकर अमर उजाला पिछले कई दिनों से अभियान चला रहा है। शासन की सख्ती और लगातार जारी अभियान का असर भी दिख रहा है। जिले का परिवहन विभाग भी हरकत में आया। जिम्मेदारों ने स्कूल प्रबंधकों को नोटिस भेजकर जल्द से जल्द स्कूली वाहनों की फिटनेस कराने के आदेश दिए। पर एक सप्ताह में महज 27 स्कूली वाहनों की ही फिटनेस हो सकी।
परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले में 602 स्कूली वाहन हैं, लेकिन इस अभियान के चलने से पहले 315 वाहन अनफिट चल रहे थे। अब भी 288 स्कूली वाहन हैं, जिनकी फिटनेस नहीं हो सकी है। इसके पीछे स्कूलों को संचालित करने वाले जिम्मेदार तो जवाबदेह हैं ही, साथ ही परिवहन विभाग भी कम जिम्मेदार नहीं है।
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गाजियाबाद हादसे के बाद जागीं एआरटीओ प्रशासन माला बाजपेयी ने आननफानन में सभी स्कूल प्रबंधकों को नोटिस जारी कर दी है, लेकिन अब बड़ा सवाल यह है कि इससे पहले परिवहन विभाग की ओर से इतनी सख्ती क्यों नहीं दिखाई गई? इस सवाल को लेकर जिम्मेदारों का जवाब है कि नोटिस जारी किया गया था। स्कूलों ने वाहनों की फिटनेस नहीं कराई गई। परिवहन विभाग के जानकारों के अनुसार, कई स्कूली वाहन ऐसे हैं, जिनकी फिटनेस दो साल से नहीं हुई। अब यह जवाब देकर जिम्मेदार भले ही अपना दामन बचाने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन हकीकत यही है कि इस मसले पर परिवहन विभाग ने संजीदगी नहीं दिखाई।
इन सवालों से कठघरे में परिवहन विभाग
-गाजियाबाद में हुई घटना और शासन की सख्ती के बाद ही क्यों जागे जिम्मेदार।
-बिना फिटनेस क्यों चलने दिए गए स्कूली वाहन।
-जिम्मेदारों ने इससे पहले इनती सख्ती क्यों नहीं दिखाई।
-कार्रवाई के नाम पर सिर्फ नोटिस भेजकर औपचारिकताएं क्यों पूरी की गईं।
-जो सख्ती और अभियान अब चल रहा है, यह पहले क्यों नहीं चलाया गया।
स्कूल खुलने के बाद भी नहीं आई याद
अप्रैल से नए सत्र की शुरुआत हो चुकी है। स्कूल-कॉलेज खुल चुके थे। कोरोना काल में खड़े रहे स्कूली वाहन सड़कों पर फिर से बच्चों को लेकर दौड़ने लगे। इसकी जानकारी परिवहन विभाग को थी। बच्चों की सुरक्षा को लेकर जिम्मेदारों को बसों की जांच करनी चाहिए थी, लेकिन सुध नहीं ली। न ही इन स्कूल प्रबंधकों को नोटिस भेजकर वाहनों की फिटनेस कराने के आदेश दिए गए और न ही बिना फिटनेस सड़कों पर चल रहे वाहनों पर कार्रवाई की गई। जब गाजियाबाद में घटना हुई तो कार्रवाई की याद आ गई।
कोविड के समय से स्कूल प्रबंधकों ने वाहनों के फिटनेस को लेकर ध्यान नहीं दिया। करीब दो सालों से स्कूली वाहन बिना फिटनेस के हैं। उस दौर में स्कूल बंद थे। इसलिए ध्यान नहीं दिया। अब स्कूल खुल रहे हैं तो फिटनेस कराई जा रही है। अगर अनफिट वाहन चलते मिले तो कार्रवाई निश्चित होगी।
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माला बाजपेयी, एआरटीओ प्रशासन
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