फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तरीनपुर रामलीला में 35 फीट लंबे रावण के पुतले का होगा दहन

विज्ञापन
सीतापुर के महमूदाबाद में संकटा देवी मंदिर में चल रही रामलीला के दौरान विजयादशमी पर जलने को तैयार - फोटो : SITAPUR
विज्ञापन
सीतापुर। बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की जीत का पर्व विजयदशमी शुक्रवार को जिले में धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। दशहरा को मनाने के लिए तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। असत्य के रास्ते पर चलने वाले रावण का पुतला बनाकर दहन कर सत्य के मार्ग पर चलकर अच्छाई का संदेश दिया जाएगा। शहर समेत कई स्थानों पर रावण के पुतले में आग लगाकर दशानन का दंभ चूर किया जाएगा।
विज्ञापन

शहर की सबसे पुरानी तरीनपुर की रामलीला में इस बार 35 फीट लंबे रावण का दहन किया जाएगा। रावण दहन को देखने के लिए शहर सहित दूूर दराज इलाकों के हजारों लोग शामिल होंगे। रावण के पुतले बनकर तैयार हो चुके हैं। दशहरे के इस पर्व को विजय दशमी भी कहा जाता है। यह बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व है। इसको लेकर लोगों में उत्साह है। दशहरा को लेकर कई कहानियां प्रचलित हैं।
सबसे ज्यादा प्रचलित कथा भगवान श्रीराम का रावण की बुराई का विनाश कर उसके घमंड को तोड़कर युद्ध जीतना है। इसी विजय को लेकर हर साल विजयदशमी मनाई जाती है। करीब 130 वर्षों से रामलीला मैदान तरीनपुर पर रामलीला का आयोजन होता है। यह रामलीला देश की आजादी से पहले होती चली आ रही है। यहां के लोगों का कहना है कि पहले अंग्रेज रामलीला का आयोजन करते थे।
विज्ञापन

उसके बाद इसे वृहद रूप देकर यहां के निवासी आयोजन करते आ रहे है। रामलीला काफी दूर तक प्रसिद्ध है। इसे देखने के लिए सीतापुर शहर ही नहीं बल्कि आस पड़ोस के गांवों के हजारों लोग आते हैं। रावण दहन के दिन यहां पर काफी भीड़ लगती है।
रामलीला कमेटी तरीनपुर के अध्यक्ष राकेश सक्सेना बताते है कि भगवान राम की कृपा से हर बरस धूमधाम से रामलीला का आयोजन होता है। इस रामलीला में कई जिलों के कलाकार आकर इसकी खूबसूरती बढ़ाते हैं। इस बार करीब 35 फीट का रावण का पुतला बनाया जाएगा। शुक्रवार शाम आठ बजे इसे फुंका जाएगा। पुतले को जलाने में गोले पटाखे भी लगाए जाएंगे।
पिसावां में बनाया गया 25 फीट ऊंचा रावण का पुतला
पिसावां (सीतापुर)। पिसावां कस्बे में 35 वर्षों से स्थानीय कलाकारों द्वारा रामलीला का मंचन किया जा रहा है। जैसे-जैसे समय बीतता गया रामलीला हाईटेक होती चली गई। 1985 में कस्बे में स्थित जय मड़ैया बाबा मंदिर पर शुरू हुई रामलीला बगैर पोशाक के जमीन पर उपले व टायर जलाकर उसकी रोशनी में शुरू की गई थी। समय बीतने के साथ ही रामलीला में अभिनय कर रहे कलाकार भी बदलते रहे।
आज के समय में जय मड़ैया बाबा सेवा समिति के नाम से संस्था रजिस्टर्ड कराकर कमेटी में हर तरह की पोशाक व तरह-तरह के पर्दे हैं। रामलीला में सबसे खास बात है कि मुस्लिम समुदाय के लोग भी सहयोग करते हैं। यह जानकारी समित के प्रबंधक विमल सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष केवल रावण का पुतला दहन किया जाएगा। इसकी लंबाई करीब 25 फीट होगी। उन्होंने बताया कि 15 अक्टूबर को शुक्रवार को विशाल भंडारे का आयोजन रात में रामलीला का समापन रावण वध के साथ किया जाएगा।
लहरपुर में 40 फीट के रावण में लगेगी आग
लहरपुर (सीतापुर)। लहरपुर कस्बे के रामलीला मैदान पक्का तालाब तीर्थ पर एतिहासिक रामलीला का प्रति वर्ष आयोजन होता है। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष प्रमोद टंडन ने बताया कि वहां पर 15 अक्तूबर को सेतु लीला का आयोजन होगा। इसमें अस्थाई रूप से विशाल सेतु बनाया जाएगा। इस सेतु लीला को देखने के लिए दूरदराज से हजारों की संख्या में लोग आते है। दूरदराज के गांवों से चलकर लोग दिन में ही आ जाते है।
वह रात भर सेतु लीला का मंचन देखते है। 18 अक्तूबर को रावण का वध किया जाएगा। इस बार करीब 40 फिट का लंबा रावण बनाया जाएगा। देर रात तक कलाकारों द्वारा भगवान राम व रावण के बीच हुए युद्ध के शानदार तरीके से मंचन किया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें