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फर्जी शिक्षकों के मामले में पुलिस नहीं लिख रही एफआईआर

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सीतापुर। सरकारी अधिकारी तहरीर दे और पुलिस एफआईआर न लिखे तो समझा जा सकता है कि पुलिस थानों में कैसे काम करती है। जब सरकारी विभागों के फर्जी शिक्षकों को लेकर एफआईआर पुलिस नहीं लिख रही है तो आम आदमी की एफआईआर कैसे लिखी जाती होगी। इसकी हकीकत बेसिक शिक्षा विभाग के पत्र बता रहे है।
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मिश्रिख, रामपुर मथुरा व रामपुर कलां पुलिस की ओर से मनमानी बरतते हुए बहुत ही लापरवाही बरती जा रही है। बीईओ की ओर से दी गई तहरीर के बाद भी एफआईआर नहीं लिखी गई है, जबकि यह शिक्षक बर्खास्त कर दिये गए हैं। मुकदमा न लिखे जाने से फर्जी शिक्षक बेधड़कघूम रहे हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग में 2010 के बाद नियुक्ति शिक्षकों की जांच चल रही है। एसटीएफ को सूचना मिली थी कि जिले में कुछ शिक्षक फर्जी अभिलेख बनाकर नौकरी कर रहे हैं। मिश्रिख विकासखंड के उच्च प्राथमिक विद्यालय दधनामऊ में सहायक अध्यापक कल्पना पाल फर्जी अभिलेख लगाकर नौकरी करते हुई मिली थीं।
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इसी तरह मिश्रिख के ही उच्च प्राथमिक विद्यालय गोहिलारी के मदनपाल व उच्च प्राथमिक विद्यालय पनाहनगर के जागेश्वर प्रसाद कूटरचित तरीके से अभिलेख बनवाकर नौकरी करते हुए मिले थे। जांच में इसकी पुष्टि होने के बाद इनको बीएसए ने बर्खास्त कर दिया था। इसी तरह रामपुर मथुरा विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय राजापुर इंसौली में सहायक अध्यापक भोला सिंह यादव भी पकड़े गये थे। पहला विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय समैयाडीह में सहायक अध्यापक दिनेश राम फर्जी तरीके से नौकरी करते हुए पकड़े जा चुके है।
इनको बर्खास्त करने के बाद बीएसए ने संबंधित ब्लॉक के बीईओ को इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। इस पर इन बीईओ ने अपने संबंधित थाने में इनके खिलाफ तहरीर दी है। इसके बावजूद पुलिस ने अभी तक इनके खिलाफ मुकदमा पंजीकृत नहीं किया है। बीईओ का कहना है कई बार थाने जा चुके है। पुलिस इंस्पेक्टर तमाम तरह की समस्या बताकर मुकदमा करने को टाल दे रहे है। बेसिक शिक्षा विभाग को जब शासन से एफआईआर मांगी जा रही है तो यह दे पाने में अक्षम साबित हो रहा है। ऐसे में पुलिस की इस कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
एसटीएफ के फोन के बाद ही लिखी थी एफआईआर
मिश्रिख इंस्पेक्टर एफआईआर लिखने में बहुत ही लापरवाही बरत रहे है। इससे पहले बीईओ ने जब तहरीर दी थी तो इंस्पेक्टर ने एफआईआर नहीं लिखी। उसके बाद एसटीएफ के एक अफसर ने खुद ही इंस्पेक्टर को फोन किया तब जाकर एफआईआर लिखी गई थी। इसी तरह इस बार भी तीन शिक्षकों के खिलाफ मुकदमा होना है तो भी इंस्पेक्टर मुकदमा नहीं लिख रहे है।
क्या कहते हैं महकमों के अफसर
बीएसए अजीत कुमार ने बताया कि फर्जी शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने में देरी होने पर एसपी को पत्र लिखकर एफआईआर दर्ज कराने का अनुरोध किया गया है। संबंधित बीईओ ने अपने थाने में इनके खिलाफ तहरीर दी है। दूसरी ओर, एएसपी दक्षिणी एनपी सिंह ने बताया कि बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से जो भी तहरीर मिलती है, उस पर मुकदमा लिखा जाता है। लेकिन गिरफ्तारी में समस्या आती है। यह लोग न्यायालय पहुंचकर स्थगन आदेश ले आते हैं।
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