सीतापुर। कोरोना के खतरे के बीच अब बरसात में संक्रामक रोगों ने पाव पसारना शुरू कर दिए हैं। इसकी हकीकत जिला अस्पताल के आंकड़े कर रहे हैं। लॉकडाउन समाप्त के बाद करीब एक माह पहले ओपीडी में जहां मरीजों की संख्या रोजाना 1200 के तक थी, अब यह आंकड़ा दो हजार के पार पहुंच गए है। इसमें सबसे अधिक मरीज बुखार, उल्टी दस्त, जुकाम, पेट दर्द के आ रहे है। इससे अस्पताल में एकाएक भीड़ बढ़ गई है। इस बढ़ोतरी के पीछे चिकित्सक बदलते मौसम को कारण बता रहे है।
इस समय बरसात का मौसम चल रहा है। सुबह कड़क धूप फिर बदली और बरसात। दिनभर बदलते मौसम ने लोगों की सेहत बिगाड़ दी थी। जिसका खामियाजा उन्हें बीमार होकर भुगतना पड़ रहा है। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. अनिल अग्रवाल बताते हैं कि लॉकडाउन समाप्त के बाद ओपीडी में रोजाना करीब 1200 मरीज आते थे। इसमें सर्दी, बुखार, चोट सहित तमाम बीमारियों से ग्रसित होते थे। लेकिन इधर एक सप्ताह से अचानक मरीजों की संख्या में इजाफा हो गया है।
इस समय ओपीडी सुबह आठ बजे से शुरू हो जाती है। दो बजे तक बराबर भीड़ लगी रहती थी। मंगलवार को ओपीडी में दो हजार से अधिक मरीज आए थे। जिसमें सबसे अधिक उल्टी, दस्त, बुखार, सर्दी, जुखाम के आ रहे हैं। यह मरीज बदलते मौसम का शिकार हो रहे है। कई मरीज तो गंभीर हो जाते है। इससे उनको भर्ती करने की जरूरत पड़ जाती है। आने वाले दिनों में मरीजों की संख्या में और अधिक इजाफा हो सकता है। बरसात का सिलसिला जारी है। बरसात के दिनों में मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। बदलते मौसम में बहुत ही सावधानी बरतने की जरूरत है।
जिला अस्पताल में डेंगू वार्ड तैयार
संक्रामक रोगों का प्रकोप फैलने का खतरा बढ़ता जा रहा है। दो दिन पहले लहरपुर में एक बालक डेंगू की चपेट में आकर मौत हो गई थी। बालक को डेंगू की पुष्टि लखनऊ प्रयोगशाला में हुई थी। वहीं से इलाज चल रहा था। लेकिन जिला प्रशासन ने जानकारी होने से इंकार कर दिया था। इस पर स्वास्थ्य महकमा अलर्ट हो गया है। जिला अस्पताल में डेंगू वार्ड बनाया गया है। अस्पताल में अभी डेंगू का कोई मामला नहीं आया है। वार्ड में मरीजों के लिए 10 बेड रिजर्व किए गए है।
ऐसे करें बचाव
इस समय मौसम में गर्मी व ठंडी एक साथ चल रही है। यह मौसम का बदलाव लापरवाही बरतने पर घातक हो सकता है। इसलिए सावधानी बरतने की जरूरत है। धूप में निकले तो उससे बचने का प्रयास करें। धूप से आने के बाद तुरंत पानी न पिएं। मच्छरों से बचने का प्रयास करें। मच्छरदानी का प्रयोग करें। घरों के आसपास गंदा पानी न जमा होने दें। ताजे फल का सेवन करें। बरसात में भीगने से बचे। अगर बुखार आता है तो तत्काल अपने चिकित्सक से सलाह ले।
- डॉ. जेएन सिंह, फिजीशियन, जिला अस्पताल
पांच दिन बाद कराएं डेंगू की जांच
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. जेएन सिंह कहते हैं कि सामान्य वायरल चार से पांच दिन तक रहता है। अगर पांच दिन बाद भी बुखार नहीं जा रहा है तो डेंगू की जांच जरूर करवा लें। डेंगू का बुखार काफी तेज व कई दिनों तक रहता है। इससे प्लेटलेट्स कम हो जाती है। जिससे शरीर में कमजोरी आ जाती है। इसलिए स्वास्थ्य के प्रति सावधान जरूर रहे।
भीड़ नियंत्रित करना बना चुनौती
इधर चिकित्सकों ने अगस्त माह में कोरोना की तीसरी लहर की आशंका जताई है। इस पर अस्पताल में अचानक भीड़ बढ़ गई है। इन सभी को कोविड प्रोटोकॉल का पालन कराना भी अब मुश्किल हो रहा है। ओपीडी से लेकर जांच केंद्र तक हर तरफ भीड़ ही भीड़ दिखाई दे रही है। ऐसे में अगर लापरवाही बरती तो कोरोना का खतरा भी मंडरा रहा है। मरीजों के सामने दोहरी मुसीबत बन गई है। अगर वह जिला अस्पताल इलाज कराने आते है तो उन्हें संक्रमित होने की आशंका है। अगर नहीं आते है तो इलाज का संकट खड़ा हो गया है।
बढ़ी मरीजों की संख्या
जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या काफी अधिक बढ़ गई है। अस्पताल में पर्याप्त दवाएं मौजूद है। डेंगू वार्ड अलग से बनाया गया है। अभी डेंगू का कोई मरीज सामने नहीं आया है।
- डॉ. अनिल अग्रवाल, सीएमएस, जिला अस्पताल