सीतापुर के नैमिषारण्य स्थित चक्रतीर्थ। - संवाद
- फोटो : SITAPUR
सीतापुर। कार्तिक पूर्णिमा का पर्व शुक्रवार को पूरे जिले में धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। नैमिषारण्य स्थित आदिगंगा गोमती के राजघाट, देवदेवेश्वर घाट समेत जनपद के सभी प्रमुख तीर्थों और घाटों पर श्रद्धालु स्नान करके दान पुण्य करेंगे।
मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा को देवता भी देवलोक में दीपदान करते हैं। इसलिए इस तिथि को देव दीपावली के नाम से भी जाना जाता है। इसी दिन सायंकाल में भगवान विष्णु ने मत्स्यावतार लिया था। इस दिन दान, जप आदि का फल दस यज्ञों के समान है। कार्तिक पूर्णिमा को पवित्र तीर्थ व नदी में प्रात:काल स्नान करने का विशेष महत्व है।
पूरे कार्तिक मास में दीपदान न किया हो तो इस दिन स्नान करने के बाद ब्रह्म मुहूर्त मेें भगवान विष्णु के लिए बहती हुई नदी में दीपदान करें, तो उस व्यक्ति को संपूर्ण कार्तिक मास में दीपदान करने का फल प्राप्त होता है। स्नान करने के बाद यथा शक्ति दक्षिणा, ऊनी वस्त्र व ब्राह्मण को दान करना हितकर होगा। गायों को चारे के दान करना श्रेष्ठ है।
नदियों में बहते दीपक को देखकर यमराज बहुत प्रसन्न होते है। देव दीपावली पर्व पर चक्रतीर्थ, हनुमान गढ़ी समेत विभिन्न स्थानों पर दीपोत्सव होगा। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर नैमिषारण्य, हरगांव व खैराबाद के भुईयां ताली तीर्थ पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।
कार्तिक पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त
आचार्य विवेक द्विवेदी ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा 19 नवंबर को दोपहर दो बजकर 28 मिनट पर समाप्त होगी। पूर्णिमा तिथि के दिन स्नान का शुभ मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 28 मिनट तक है। दान करने का शुभ समय 19 नवंबर को सूर्यास्त से पहले तक है। भारत में आंशिक चंद्रग्रहण 19 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 48 मिनट पर शुरू होगा। 4 बजकर 17 मिनट तक दिखाई देगा। उत्तर भारत में इसका प्रभाव नहीं होगा।