कमलापुर (सीतापुर)। सचिव की मनमानी कार्यशैली से पीएम आवास अपात्रों को स्वीकृत किए जा रहे हैं। एनसीपी जिलाध्यक्ष की शिकायत पर पीडी डीआरडीए के निर्देश पर एक ग्राम पंचायत की जांच की गई। इसमें नौ अपात्रों को आवास स्वीकृत कर धनराशि भेजे जाने का खुलासा हुआ है। बीडीओ ने संबंधित सचिव का जवाब तलब करने के बाद उन्हें दोषी ठहराते हुए जांच रिपोर्ट पीडी को भेजी है।
प्रकरण विकास खंड कसमंडा की ग्राम पंचायत कैमा का है। यहां कई अपात्रों को आवास का लाभ देने की शिकायत राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष प्रवीन कुमार सिंह ने परियोजना अधिकारी से की थी। इस संबंध में साक्ष्य के रूप में जिस परिवार के पति-पत्नी दोनो को आवास स्वीकृत किए गए। उनका विवरण भी अंकित किया गया।
पीडी एके सिंह ने जांच के निर्देश तत्कालीन बीडीओ कसमंडा को दिए थे। बीडीओ ने जेई आरईएस मूलचंद यादव से जांच कराई तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच में पाया गया, कई ऐसे दंपती हैं जिन्हें आवास का दोहरा लाभ दिया गया है। नौ अपात्रों को आवास की धनराशि दिए जाने की पुष्टि हुई है।
इन अपात्रों को दिया गया आवास
जिन दंपतियों और एक ही परिवार के लोगों को दो बार आवास आवंटित किए गए, उनमें कन्हैया और उनकी पत्नी बिंदेश्वरी को लाभ दिया गया है। इसी प्रकार रामसरन व उनकी पत्नी रूपरानी, मुन्नू और उनकी पत्नी राजरानी, सोबरन के साथ ही उनकी पत्नी अजय कुमारी, इंद्रमोहन व उनकी पत्नी शीतल, कमलेश व पत्नी किरन, प्रेमचंद्र सहित उनकी पत्नी मधुरानी, संतोष व उनकी पत्नी किरन, नरेश व उनके भाई रामनरेश शामिल हैं।
बीडीओ ने ग्राम विकास अधिकारी कैमा मयूरेश राय से जवाब मांगा और तीन दिनों में अपना पक्ष प्रस्तुत करने को कहा है। कहा, तीन दिनों में संतोषजनक जवाब न मिलने पर दोहरे आवंटित आवासों की संपूर्ण धनराशि वेतन से वसूल की जाएगी। बीडीओ ने जांच आख्या परियोजना निदेशक को भी भेज दी है।
ब्लाक कसमंडा की ग्राम पंचायत कैमा के नौ अपात्रों को पीएम आवास योजना का लाभ देने के मामले में ग्राम विकास अधिकारी मयूरेश राय और पटल सहायक शशिकांत बाजपेई दोषी हैं। इनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
- अरुण कुमार सिंह, परियोजना निदेशक, डीआरडीए