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रूरल बेल्ट में बहुत सारी प्रतिभाएं, बस उन्हें तरासने की जरूरत: आरपी सिंह

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कमलापुर (सीतापुर)। हमारे देश की कल्पना सिर्फ मेट्रो और बड़े शहरों से नहीं की जा सकती। इसमें गांवों का योगदान बहुत बड़ा है। रूरल बेल्ट में बहुत सारी प्रतिभाएं हैं। उन्हें बस संसाधन और मार्गदर्शन की जरूरत है। यह बातें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर आरपी सिंह ने रविवार को पंडित दीन दयाल उपाध्याय कौशल विकास केन्द्र कंदुनी के नवनिर्मित भवन के लोकार्पण तथा फ्रैंडली मैच के पुरस्कार वितरण समारोह में कहीं।
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बारिश के बाद भी मैच होने को लेकर आरपी सिंह ने अपने बचपन का एक किस्सा साझा करते हुए कहा कि वह 12-13 साल के रहे होंगे, उनके शहर रायबरेली के स्टेडियम में मैच होना था। मैच के पहले बारिश हो गई। बारिश रुकते ही हम सबने दरी लेकर ग्रांउड से पानी हटाया फिर मैच हुआ। आज यहां भी मैच के प्रति वही जज्बा दिखा। उन्होंने कहा यही हमारी सीख और आगे बढ़ने की ललक है। आरपी सिंह ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सुविधाओं व संसाधनों वाला क्रिकेट ग्रांउड बनवाना एक बेहतरीन पहल है। बच्चे यहां क्रिकेट की बारीकियां सीखेंगे। आज के पांच-छह साल बाद यहां के बच्चों में से कोई आगे निकलकर अपने गांव तथा देश का नाम रोशन करेगा, ऐसा मेरा विश्वास है और इसके लिए मेरी शुभकामनाएं भी हैं।
इससे पहले स्व. महंत बक्स सिंह उर्फ जय चौधरी की जयंती पर आयोजित जय-जावेद फ्रैंडली मैच स्पोर्टस कॉलेज लखनऊ और पंडित दीनदयाल उपाध्याय कौशल विकास केंद्र कंदुनी की टीम के मध्य खेला गया। बारिश की वजह से पांच-पांच ओवर के खेले गए इस मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए लखनऊ की टीम ने 38 रन बनाए। लक्ष्य का पीछा करते हुए कंदुनी की टीम महज 20 रन बनाकर ऑलआउट हो गई। क्रिकेटर आरपी सिंह ने दोनों टीमों के खिलाड़ियों को पुरस्कार प्रदान किया। जिसके बाद पंडित दीन दयाल उपाध्याय कौशल विकास केन्द्र कंदुनी के नवनिर्मित भवन का फीता काटकर लोकार्पण किया। फिर उन्होंने कैंपस में पौधरोपण भी किया। इस मौके पर संस्थान की प्रेसीडेंट गुंजन चौधरी और डायरेक्टर शरद चौधरी मौजूद थे।
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बुजुर्गों को किया गया सम्मानित
समारोह में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर आरपी सिंह ने सात बुजुर्गों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। संस्थान के डायरेक्टर शरद चौधरी ने बताया कि यह बुजुर्ग उनके पिता स्व. मंहत बक्स सिंह उर्फ जय चौधरी के साथी रहे हैं। सम्मानित होने वाले बुजुर्गो में त्रिभुवन नाथ मिश्र, नंद किशोर, मैकू बाबा, बुंधा, बाबू, मथुरा प्रसाद, ढोडे़ शामिल थे।
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