मछरेहटा (सीतापुर)। सीएचसी मछरेहटा में मरीजों को जांच के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। एक्स-रे व अल्ट्रासाउंड कराने के लिए करीब 20 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय जाना पड़ रहा है। इसकी वजह से रोजाना 10 से 15 मरीज मरीज बिना एक्स-रे कराए ही वापस लौट रहे हैं। इससे मरीजों को सीएचसी पर इलाज मिलना मुश्किल हो रहा है।
सीएचसी मछरेहटा की ओपीडी में रोजाना 250 से 300 मरीज इलाज कराने के लिए आते हैं। इसमें हड्डी रोग सहित अन्य बीमारियों के 10 से 15 ऐसे मरीज होते हैं, जिनको एक्स-रे कराने की जरूरत होती है, लेकिन सीएचसी में एक्स-रे की कोई सुविधा नहीं है। इससे मरीजों को जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया जाता है।
मछरेहटा से जिला मुख्यालय की करीब 20 किलोमीटर की दूरी मरीजों को तय करनी पड़ रही है। इसी तरह यहां पर आने वाली गर्भवती को अल्ट्रासाउंड की कोई सुविधा नहीं मिल पा रही है। वह भी जांच के लिए जिला अस्पताल पर ही निर्भर रहती हैं। इससे मरीजों को यहां पर सुविधाएं मिलना मुश्किल हो रही है।
चिकित्सकों की भी है कमी
सीएचसी मछरेहटा में कई विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद खाली चल रहे हैं। इसकी वजह से मरीजों को बेहतर इलाज मिलना मुश्किल हो रहा है। यहां पर आंख रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ व बाल रोग विशेषज्ञ के पद खाली चल रहे है। इससे कारण कामचलाऊ व्यवस्था के जरिये इलाज दिया जा रहा है।
केवल मिल रही हैं दवाएं
इलाज कराने आई मधुरानी ने बताया कि सीएचसी पर जांच की सुविधा नहीं है। एक्स-रे के लिए सीतापुर मुख्यालय जाना पड़ता है। दूरी अधिक होने से आवागमन में दिक्कतें आती हैं। रामप्यारी का कहना है कि ओपीडी में आस पड़ोस गांवों के तमाम मरीज रोजाना इलाज कराने आते हैं। लेकिन उनको केवल दवाइयां देकर वापस कर दिया जाता है। सरोजनी ने बताया कि सीएचसी पर अल्ट्रासाउंड की जांच का अभाव बना हुआ है। गर्भवती को अल्ट्रासाउंड के लिए जिला अस्पताल जाना पड़ता है। जांच काफी महंगी होती है।
नहीं है सुविधा
एक्स-रे व अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं है। इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को कई बार दी जा चुकी है। मौजूदा संसाधनों से इलाज किया जा रहा है।
- डॉ. कमलेश कुमार, सीएचसी अधीक्षक मछरेहटा