गांव की समिति रोकेगी सीमा पर मानव तस्करी
सिद्धार्थनगर। भारत-नेपाल सीमा पर होने वाली मानव तस्करी को रोकने के लिए स्पेशल टीम काम करेगी। सीमावर्ती गांवों में टीम के रूप में समितियों का गठन किया जा रहा है। ये समितियां मानव तस्करी सहित अन्य अपराध रोकने और लोगों को जागरूक करेंगी। इसमें गांव के प्रधान, थाने की पुलिस और स्वयं सेवी संस्थाएं शामिल रहेंगी। तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने के लिए यह कवायद शुरू हुई है।
भारत-नेपाल की सीमा पूरी तरह से खुली है। जिले का 68 किलोमीटर क्षेत्र नेपाल सीमा से लगता है। पांच थाना क्षेत्र सीमा से लगे हुए हैं। मगर सीमा पर कई प्रकार की आपराधिक गतिविधियां सक्रिय रहती हैं। हालांकि सुरक्षा एजेंसियां इन पर नकेल कसने का कार्य कर रही हैं। मौजूदा समय में सीमा पर मानव तस्करी के मामले आए दिन सामने आ रहे हैं। ये वे मामले हैं, जो सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ में आते हैं। बढ़ती हुई मानव तस्करी को रोकने के लिए पुलिस ने कवायद शुरू की है। अब सीमावर्ती गांव के लोगों को जिम्मेदार बनाते हुए उनके सहयोग से इस पर अंकुश लगाने की तैयारी है।
इसके लिए गांव स्तर पर स्पेशल समिति का गठन किया जा रहा है, जो सीमा क्षेत्र में होने वाली हर गतिविधियों को रोकने का कार्य करेगी। इसके नोडल अपर पुलिस अधीक्षक सुरेशचंद रावत हैं। वह स्वयं टीम की मॉनिटरिंग करेंगे। इस प्रकार के अपराध में पकड़े जाने वाले पर कार्रवाई करेंगे। इस संबंध में एएसपी सुरेश चंद रावत ने बताया कि मानव तस्करी सहित सीमा पर होने वाले अन्य अपराध को रोकने के लिए सीमावर्ती गांव में समिति का गठन किया जा रहा है।
68 किलोमीटर सीमा पर बनेगी 54 समिति
नेपाल सीमा से सटे 54 गांव हैं। यहां गांव स्तर पर समिति गठित होगी। इसमें ग्राम प्रधान, गांव के संभ्रांत व्यक्ति, सेवानिवृत्त शिक्षक, सीमा क्षेत्र में काम करने वाले स्वयंसेवी संस्था के सदस्य, थाने की महिला हेल्पडेस्क की आरक्षी, थाना स्तर पर बने बाल कल्याण अधिकारी टीम के सदस्य होंगे। ये समय-समय पर लोगों को जागरूक करेंगे। अगर कोई संदिग्ध दिखता है या संदिग्ध हरकत है तो ये लोग पुलिस को सूचना देंगे। इसके अलावा बार्डर की हर जानकारी अपडेट करेंगे, जिससे मानव तस्करी सहित अन्य अपराध को रोका जा सके।
त्रासदी के बाद बढ़ी मानव तस्करी
नेपाल से लोगों को खाड़ी देशों में भेजने का धंधा नेपाल में आए भूकंप के बाद बढ़ गया। कारण त्रासदी के बाद बहुत कुछ तबाह हो चुका था। रोटी के लाले पड़ गए थे। उसके बाद पिछले दो वर्ष से कोरोना संक्रमण के चलते भी बहुत कुछ बर्बाद हुआ। पेट की आग बुझाने के लिए लोग मानव तस्करों के चंगुल में फंस रहे हैं। अच्छे रोजगार और बेहतर जीवन का लालच देकर तस्कर उन्हें भारत सहित अन्य खाड़ी देशों में भेज रहे हैं। इन दिनों भारत-नेपाल सीमा पर इस प्रकार के अपराध बढ़ गए हैं।