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पशुओं को बचाने के लिए अपनी जिंदगी लगा रहे दांव पर

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शोहरतगढ़ क्षेत्र के खैरी शीतल प्रसाद गांव में कमर भर बाढ़ के पानी को पार करके पशुओं के लिए चारा ले? - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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पशुओं को बचाने के लिए अपनी जिंदगी लगा रहे दांव पर
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सिद्धार्थनगर। बाढ़ की विभीषिका में आदमी ही नहीं, बल्कि पशु भी बेहाल हैं। पशुपालक अपने पालतू पशुओं की जान बचाने के लिए बाढ़ के पानी में जोखिम उठा रहे हैं।
पशुपालक बाढ़ के पानी में लंबी दूरी तक तैरकर या नाव के माध्यम से चारे का इंतजाम कर रहे हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुपालकों ने अपनी दिनचर्या बदल दी है। बाढ़ की लहरों ने गांवों को अपने चपेट में लिया है तो घर के साथ पशुओं की घारी भी डूब गई है। पशुपालक गांव के बाहर पशुओं के साथ जीवन व्यतीत कर रहे हैं। कोई बांध अपने पशुओं को बांधकर चारा जुटा रहा है तो कोई पुल पर शरण ले चुका है। बाढ़ से पहले ही पशुपालकों ने भूसा को छतों पर रखकर बचाया है, जो अब काम आ रहा है। भैंस, गाय, भेड़-बकरी, मुर्गियों के लिए लोगों ने नया ठिकाना बना लिया है। ग्रामीणों के अनुसार बाढ़ सुरक्षा चौकियों पर पशुओं की सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं है।
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बांसी प्रतिनिधि के अनुसार, पशुओं के रहने और उनके चारे का संकट उत्पन हो गया है। बृहस्पतिवार को पशुपालक जोखिम उठाकर अपने साथ साथ पशुओं को सुरक्षित स्थान पर लेकर पहुंचे। वे भूसा व चारा का इंतजाम करते नजर आए। मूसलाधार बारिश से क्षेत्र का कटहा गांव पूरी तरह पानी से घिर गया है। पशुओं की घारियों में भी जलभराव है। गांव के लोगों ने डुमरियागंज-बांसी बांध पर अपना नया ठौर बनाना शुरू कर दिया। बास-बल्ली व पन्नी लगाकर लोगों ने पशुओं तथा अपने रहने का इंतजाम कर लिया। पशुओं को चारा मुहैया कराने के लिए लोग पानी में घुसकर गांव भूसा सुरक्षित स्थान पर देखे गए। ऐसा ही हाल क्षेत्र के गरगजवा, पिपरहिया, मेचुका, मझवन कला, महुआ कला, डड़वा घाट, गोठवा घाट, तेलौरा घाट आदि गांवों का है।
परसा प्रतिनिधि के अनुसार खैरी शीतल प्रसाद के टीकर और करौता टोलों के बीच बूढ़ी राप्ती नदी पर बने पुल पर ग्रामीणों ने अपने गोवंशीय पशुओं को बाढ़ से बचाने के लिए शरण लिया हुआ था। सबसे अधिक समस्या पशुओं के चारे की हो गई है। घर में रखे गए भूसे पानी में भीग चुका है। सीवान में बाढ़ का पानी होने के कारण हरे चारे की समस्या उत्पन्न हो गई है। नकोलडीह टोले पर जाने वाला एकमात्र संपर्क मार्ग पर लगभग ढाई फिट पानी बह रहा है। लोगों के आवागमन का एकमात्र साधन नाव है। पन्नापुर टोले में सड़क पर ढाई फीट पानी बह रहा है। लोग अपने गैस सिलेंडर को भराने व बोई गई सब्जियों को बाजार में पहुंचाने के लिए घुटने भर पानी में चलकर बाहर निकल रहे हैं। एक युवती सिर पर हरा चारा लेकर कमर भर पानी को पार करते हुए दिखी।
मन्नीजोत प्रतिनिधि, के अनुसार भनवापुर ब्लॉक क्षेत्र के पेंड़ारी मुस्ताहकम गांव निवासी साहेब अली ने बताया कि हमारे घरों में पानी ज्यादा हो गया भोजन बनाने रहने का कोई स्थान नहीं है। नाव के सहारे चारे के संकट से उबरने की कोशिश की जा रही है। कमर भर पानी में चलकर लोग खुद के लिए राशन व पशुओं के लिए चारे का इंतजाम कर रहे हैं। गोद और ठेले पर बकरियों को लेकर लोग गांव के बाहर जाते दिखे।
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टड़िया बाजार प्रतिनिधि के अनुसार, क्षेत्र में गांवों में पानी घुसने के कारण पशुपालक परेशान हैं। दुधारू भैंसें सड़कों के पटरियों पर बची कुछ घास को चरकर ही भूख मिटा रही हैं। भैंस चरा रहे महंगू ने बताया कि चारे के संकट के कारण भैंस का दूूध कम हो गया है। बुधई यादव ने कहा कि दूध से ही परिवार का खर्च चलता है। यहीं कारण है कि भैंस के साथ जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
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