दिलीप ने बताया कि वांगचुक ने पानी और पेड़ बचाने के सुझाव दिए। टीम ने मंगलवार को लद्दाख स्थित वांगचुक के हिमालय इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव हिमालय को भी देखा, जो देश का पहला कार्बन न्यूट्रन संस्थान है। प्रधान के साथ ग्राम पंचायत के सचिव जयप्रकाश, पंचायती राज विभाग के कंसल्टेंट सुशील सिंह, बाल सरपंच श्रिया त्रिपाठी, क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया के निदेशक हिमांशु पटेल बुधवार को वह मकान देखने जाएंगे, जो आमिर खान की फिल्म थ्री इडिएट में दिखाया गया था।
लेह के पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक, जिनके किरदार को थ्री इडिएट फिल्म में फुंगसुक वांगडू उफ रैंचो नाम से फिल्माया गया था, वह लद्दाख में पर्यावरण संरक्षण को लेकर कई प्रयोग कर चुके हैं। उनकी खोजी गई 400 से अधिक तकनीक का पेटेंट हो चुका है।
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हंसुड़ी औसानपुर को बीएचयू ने लिया है गोद
ग्राम प्रधान दिलीप त्रिपाठी ने वांगचुक को बताया कि बीएचयू वाराणसी ने उनकी ग्राम पंचायत को कार्बन न्यूट्रल बनाने के लिए गोद लिया है। यह भी बताया कि देश में बाल हितैषी ग्राम पंचायतों में हसुड़ी औसानपुर को तीसरा स्थान मिला था, जबकि गांव के विद्यालय में स्पेश लैब बनाई गई है। वांगचुक ने सुझाव दिया कि गांव में मॉडल घर बनाए, जिसे देखकर और लोग भी प्रोत्साहित हों। यह पर्यावरण के लिहाज से अच्छा है, जबकि इसमें अधिक सर्दी और गर्म मौसम में सुखद अनुभूति होगी।
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बोतल में नमक-पानी भरकर गर्म बना दिया घर
ग्राम प्रधान दिलीप त्रिपाठी ने बताया कि सर्द मौसम में घर को गर्म बनाने के लिए वांगचुक ने बोतलों का प्रयोग किया है। बोतल में नमक और पानी का घोलकर भरकर दीवार बनाई गई है। धूप होती है तो दीवार ऊष्मा अवशोषित कर लेती है और गर्मी बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि वांगचुक ने पूछा कि उत्तर प्रदेश में मकान का तापमान कितना डिग्री होता है। दिलीप ने जब बताया कि गर्मी में 40 डिग्री तापमान होता है, तो वांगचुक ने मुस्कराते हुए कहा कि इस पर तो रिसर्च करना पड़ेगा कि कैसे गर्म मौसम में तापमान कम रहेगा।