गुलजार हुए परिषदीय विद्यालय, पहले दिन बच्चों की उपस्थिति रही कम
-कोरोना नियमों का पालन कर पठन-पाठन शुरू किया गया
-मास्क लगाकर विद्यालय पहुंचे अधिकतर बच्चे, दिखा जागरुकता का असर
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। घटते कोरोना संक्रमण के बीच शासन के निर्देश पर सोमवार को कक्षा एक से लेकर आठ तक के बच्चों का पठन-पाठन विद्यालयों में शुरू हो गया। कोरोना के चलते लंबे समय से बंद चले रहे परिषदीय व अन्य विद्यालयों में पढ़ाई बंद थी। स्कूल खुलने से बच्चों में भी काफी उत्साह देखा गया और लंबे समय बाद विद्यालय पहुंचने की खुशी उनके चेहरों पर साफ दिखी। अधिकतर बच्चे मास्क लगाकर विद्यालय पहुंचे, जबकि विद्यालयों में भी कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए पूरी सतर्कता बरती गई।
उसका बाजार क्षेत्र में सोमवार को परिषदीय समेत मान्यता प्राप्त विद्यालय बच्चों से गुलजार हो गए। परिषद के 121 विद्यालय के अलावा 20 मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों में लगभग बीस हजार बच्चे अध्ययनरत हैं। पहले दिन विद्यालयों में औसतन उपस्थिति 50 फीसदी देखी गई। कोरोना संबंधी नियमों का पालन करते हुए बच्चे मास्क लगाकर स्कूल पहुंचे। अध्यापकों ने भी बच्चों को कमरों में बैठाने के दौरान सामाजिक दूरी का पालन किया। इस संबंध ने बीईओ महेंद्र कुमार ने पहले ही कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए विद्यायलों के संचालन का निर्देश जारी किया था। वहीं ककरहवा क्षेत्र में भी परिषदीय विद्यालय सोमवार से खुल गए। हालांकि, पहले दिन बच्चों की संख्या कम देखी गई, लेकिन माना जा रहा है कि दो-चार दिनों में बच्चों की संख्या में वृद्धि होगी। प्राथमिक विद्यालय ककरहवा की प्रधानाध्यापक विभा यादव ने बताया कि अभिभावकों को स्कूल खुलने की सूचना दे दी गई है और इसके लिए अध्यापक भी लोगों से घर-घर जाकर संपर्क कर रहे हैं। पूर्व माध्यमिक विद्यालय ककरहवा में 25 बच्चे स्कूल में पढ़ने आएं। शिक्षक राम सेवक ने बताया कि बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए प्रयास किया जा रहा है और इसके लिए अभिभावकों से संपर्क जारी है। पकड़ी बाजार क्षेत्र में भी परिषदीय विद्यालयों में रौनक देखने को मिली। कोरोना नियमों का पालन करते हुए बच्चों के लिए सेनिटाइजर का भी प्रबंध किया गया था। प्राथमिक विद्यालय जखौलिया में पहले दिन 59 बच्चे उपस्थित थे। शिक्षकों ने बताया कि लंबे अरसे के बाद स्कूल खुले हैं। एक-दो दिन में संख्या में बढ़ोतरी होगी। कोरोना नियमों का पालन करते हुए पठन-पाठन कार्य शुरू किया गया है।