जेल में भाई की कलाई पर नहीं बांध पाई राखी
सिद्धार्थनगर। रक्षाबंधन भाई और बहनों का त्योहार है। इसके लिए जेल में भी भाइयों को राखी बांधने के लिए बहनों को छूट दी जाती है। रविवार को कुछ बहनें भाई को राखी बांधने के बाद खुश होकर बाहर निकलीं। वहीं कुछ को निराश लौटना पड़ा। कोरोना की आरटीपीसीआर की रिपोर्ट न होने के कारण वे अंदर नहीं जा पाईं। हालांकि उनकी राखी अंदर भाई तक पहुंचा दी गई।
इस बार 65 बहनों ने भाइयों को राखी बांधी। कोरोना संक्रमण के कारण पिछले वर्ष से ही जेल में कुछ नियम बदल दिए गए हैं। इस वर्ष कोरोना संक्रमण कम हुआ तो मुलाकात शुरू कर दी गई है। मगर मुलाकातियों को कोरोना की आरटीपीसीआर की रिपोर्ट लेकर आने पर ही अंदर जाने का मौका मिलता है। रक्षा बंधन के पर्व पर रविवार को जिला कारागार में भाइयों को राखी बांधने के लिए छूट दी गई थी। सुबह नौ बजे से शुरू होने वाले मुलाकात के लिए सुबह से ही बहनें राखी और मिठाई लेकर पहुंच गई थीं। 61 लोगों के पास कोरोना निगेटिव होने की आरटीपीसीआर रिपोर्ट थी।
उन्हें अंदर जाने दिया गया। इसके अलावा जेल में बंद चार बहनों ने राखी बांधकर भाई की लंबी उम्र की कामना की। वहीं कुछ बहनें ऐसी थीं, जिनके पास आरटीपीसीआर की रिपोर्ट न होने के कारण उन्हें भाई से न मिल पाने का मलाल दिखा। जेल अधीक्षक आरके पांडेय ने बताया कि कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए बहनों को मिलवाया गया। गाइडलाइन का पालन करते हुए उन्होंने भाईयों को राखी बांधी।